Nine lives became silent: गोवा में छुट्टियां मनाने गये राजेंद्र कश्यप के मोबाइल पर रिंग हुआ। उनके बड़े बेटे कमल का फोन था। उन्होंने बड़ी खुशी में फोन उठाया, लेकिन उधर से आवाज़ आई कि पापा-पापा हमें बचा लो। घर में आग लग गई है और हम फंस गये हैं, प्लीज़ बचा लो।
ये घटना दिल्ली के पालम इलाके की है। जहां बुधवार को भीषण आग लगने से 9 लोग अपनी जान गंवा बैठे। इनमें तीन मासूम भी शामिल हैं।
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दमकल की 30 गाड़ियों को आग बुझाने के लिए आना पड़ा।
रेस्क्यू टीम ने 10 लोगों को मौके से बचा लिया, लेकिन 9 लोगों अपनी जान से हाथ धो बैठे।
इस इमारत में 22 परिवार रहता था। बेसमेंट से लेकर पहले तल्ले तक कपड़े और कॉस्मेटिक्स की कई दुकानें चल रही थीं। दूसरी और तीसरी मंजिल पर लोग अपने परिवार के साथ रहते थे।
राजेंद्र कश्यप का परिवार हादसे वाली बिल्डिंग में रहता था। रिश्तेदारों के मुताबिक उनके पास उनके बड़े बेटे कमल का फोन आया जिसमें उसने आग लगने की जानकारी देते हुए बचा लेने की गुहार लगायी थी।
जान गंवाने वालों में प्रवेश और हिमांशी ने भी अपने पिता को कॉल करके मदद की गुहार लगायी थी। कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों तो कुछ ने अपने दोस्तों को फोन किया।
फोन कॉल के बाद कुछ लोगों के दोस्त और रिश्तेदार बिल्डिंग के नीचे पहुंच भी गये थे लेकिन आग इतनी भयावह थी कि कुछ न कर पाने को मजबूर थे।
हादसे में जान गंवाने वाली दीपिका ने अपने पिता को फोन कर कहा कि अब वो नहीं बच पायेगी। दीपिका के पति अनिल अपनी बेटी मिताली को लेकर तीसरी मंजिल से नीचे कूद गये।
तकनीक ने ले ली जान
घटना के कारणों की जांच हो रही है लेकिन हादसे के वक्त क्या-क्या हुआ था, यह खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है। अब तक जांच में घटना का जो कारण सामने आया है उसमें मौक की वजह ऑटोमेटिक डिजिटल लॉक को बताया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि घर के हर कमरे में ऑटोमेटिक डिजीटल लॉक लगाया गया था। ये सभी बिजली से ऑपरेट होते थे। आग लगते ही घर के एमसीबी ट्रिप हो गये और बिजली विभाग ने बिजली भी काट दी थी। ऐसे में ये लॉक खुल नहीं पाया और लोग अपने कमरों में ही फंस गये।
