टेलिकॉम कंपनियों की लूट, झांसे में रह रहे उपभोक्ता, हर रोज करोड़ों-अरबों की चपत लग रही उपभोक्ताओं को

mobile recharge

How Telecom companies are Looting: मोबाइल, एक ऐसी चीज़ जिसके बिना आज जीवन की कल्पना बेहद मुश्किल है। हालांकि ऐसा नहीं है कि बिना मोबाइल फोन के आप ज़िंदगी नहीं जी सकते। लेकिन दौड़ती-भागती ज़िंदगी में कदम से कदम मिलाने के लिए मोबाइल बेहद ज़रूरी है।

मोबाइल के फायदे

  • कितना भी दूर रहकर हम एक-दूसरे से आसानी से कनेक्ट रहते हैं।
  • किसी जगह जाना है और पता नहीं मालूम तो गूगल मैप से मदद मिलती है।
  • खबर या संदेश को शेयर करने के लिए कई मैसेजिंग एप्प मौजूद हैं।
  • दुनिया की किसी भी चीज़ के बारे में जानकारी हासिल करनी हो तो बस एक क्लिक में मौजूद होता है।
  • बैंकिंग सेक्टर में मोबाइल इंटरनेट की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • सिनेमा, सीरियल या कोई मनोरंजन चाहिये तो मोबाइल है ना।

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शिक्षा, कामकाज, बैंकिंग, संचार और हर ज़रूरत में मोबाइल आपका दोस्त है। सोचिये, एक छोटा सा मोबाइल अगर आपके हाथ में है तो आप कह सकते हैं कि पूरी दुनिया आपकी मुट्ठी में है।

यही वजह है कि मोबाइल अब हर किसी की ज़रूरत बन गया है। इसी का फायदा टेलीकॉम कंपनियां उठाने में लगे हैं। और सबसे बड़ी बात यह कि हमें इस बात की भनक तक नहीं लगती।

कैसे लग रही है चपत?

कोई भी उपभोक्ता किसी भी कंपनी का फोन रिचार्ज कराता है तो उसको उसी प्लान के अनुसार इंटरनेट डाटा (1 जीबी, 1.5 जीबी, 2 जीबी, 3 जीबी) मिलता है। लेकिन यह डाटा प्रतिदिन के हिसाब से मिलता है, जो प्रतिदिन के हिसाब से खत्म भी हो जाता है।

अगर उस दिन आपने डाटा इस्तेमाल नहीं भी किया तो भी आपके हक का मोबाइल डाटा खत्म। अगले दिन फिर से नया डाटा शुरू हो जाता है।

सवाल यह है कि जब हमने मोबाइल डाटा के पूरे पैसे दिये तो पूरा डाटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता।

उपभोक्ता से पैसा पूरा लेने के बावजूद रात में ही डाटा खत्म क्यों कर दिया जाता है। बचा हुआ डाटा अगले दिन कैरी फॉरवर्ड क्यों नहीं होता।

डेली लिमिट खत्म होने पर फिर करें रिचार्ज

आजकल टेलीकॉम कंपनियां छोटा रिचार्ज का ऑफर रखती हैं। मतलब अगर आपका डेली लिमिट का डाटा खत्म हो गया है तो 1 दिन में 1 जीबी, 2 दिन में 2.5 जीबी या ऐसे ही कुछ और रिचार्ज ऑफर रखती है।

सवाल यह है कि डेली लिमिटेड डाटा प्लान की जगह मंथली डाटा प्लान उपलब्ध क्यों नहीं कराते। रोज 2 जीबी देने की बजाय महीने का 60 जीबी दें। इसे उपभोक्ता अपनी ज़रूरत के हिसाब से इस्तेमाल करेगा।

मान लीजिये कि आपको किसी दिन 4 से 6 जीबी डाटा की ज़रूरत है तो आपने इस्तेमाल कर लिया। किसी दिन 1 जीबी की ही ज़रूरत है तो उतना ही इस्तेमाल किया। इससे न केवल आपका डाटा बचेगा बल्कि आपके छोटा रिचार्ज वाले पैसे भी बचेंगे।

महीने के अंत में अगर पूरा डाटा इस्तेमाल नहीं कर पाते तो बचे हुए डाटा को अगले रिचार्ज में जोड़ दिया जाये।

अब सोचिये हर रोज लाखों-करोड़ों जीबी डाटा ये टेलिकॉम कंपनियां उपभोक्ताओं का ही बचा रही हैं। और लाखों यूजर्स के छोटा रिचार्ज के बहाने करोड़ों की चपत भी लगा रही है।

ऐसे में हम उपभोक्ताओं का अधिकार है कि इस दिशा में उपभोक्ता फोरम, सरकार और संबंधित एजेंसियां ठोस पहल करे ताकि हमें अपने अधिकारों से वंचित न होना पड़े।