बीजेपी के मास्टरस्ट्रोक में फँस गया विपक्ष, महिला आरक्षण विधेयक पर चित भी अपनी पट भी अपनी

Women’s reservation bill: सदन में बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक और पूरा विपक्ष इस जाल में फंस गया।

महिला आरक्षण कानून में संशोधन और डीलिमिटेशन से जुड़े बिल लोकसभा में गिर गये।

बीते 12 सालों में एनडीए सरकार की तरफ से पेश किया गया ये पहला विधेयक है जो सदन में गिर गया।

दो दिनों तक इस विधेयक पर बहस हुई फिर शुक्रवार की शाम को मतदान हुआ।

इन बिलों के समर्थन में 298 मत पड़े जबकि विरोध में 230 मत पड़े। इस विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को कम से कम 352 मतों की ज़रूरत थी।

बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक

एनडीए सरकार ने इस बिल को ऐसे समय में सदन में पेश किया जब कई राज्यों में चुनाव सिर पर हैं।

अगर ये बिल पास हो जाता तो केन्द्र सरकार की महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर मंशा कामयाब हो जाती।

राज्यों के चुनाव में बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने में लग जाती। महिलाओं के आरक्षण का पूरा क्रेडिट बीजेपी खुद लेने की कोशिश में रहती।

अब जब बिल पास नहीं हुआ है तब क्या होगा।

विपक्ष इसे भले ही अपनी जीत बता रहा हो लेकिन यह बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

अभी कई राज्यों में चुनाव होने हैं। कुछ ही दिनों में मतदान है। ऐसे में बीजेपी इसे मुद्दे को चुनाव में जमकर भुनाना चाहेगी।

बीजेपी अपने चुनावी भाषणों और लोगों के बीच जाकर यह कहेगी कि उन्होंने पूरी कोशिश की महिलाओं को आरक्षण देने की लेकिन विपक्ष ने रोड़ा अटका दिया।

यानी सारा ठीकरा विपक्ष पर फोड़ महिला मतदाताओं की सिम्पैथी लेने की कोशिश में बीजेपी जुट गई है।

देशभर में बीजेपी नेता और कार्यकर्ता विपक्ष के इस कदम का विरोध करने सड़क तक उतर गये हैं।

अब विपक्ष इस मुद्दे पर महिला मतदाताओं को कैसे अपने पक्ष में करता है ये देखने वाली बात होगी।

बिल अटकने के बाद किसने क्या कहा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू

देश की महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने के बिल का विपक्ष ने साथ नहीं दिया। ये बहुत खेद की बात है।

आपके पास एक मौका था जिसे आपने गंवाया है। महिलाओं को सम्मान देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम अधिकार देकर ही रहेंगे।

तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी

प्रधानमंत्री को जब लगता है कि वो चुनाव हार जायेंगे तो वो नियम ही बदल देते हैं, ये विधेयक सिर्फ राजनीतिक मकसद से लाये जा रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी

ये देश के लोकतंत्र की बात थी, देश की अखंडता की बात थी। हम महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर कभी सहमत नहीं हो सकते।

ये मुमकिन ही नहीं था कि ये बिल पारित हो।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव

विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची कि सरकार उस लक्ष्मण रेखा को पार ही नहीं कर पायी।

दरअसल बीजेपी को पता था कि यह बिल पहले से ही काफी विवादों में है। ऐसे में इसका पास होना बेहद मुश्किल होगा।

बीजेपी को यह भी पता था कि सदन में दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ करना बेहद मुश्किल है।

फिर भी बीजेपी ने इस बिल को सदन के पटल पर पेश किया, क्योंकि बीजेपी दोनों परिस्थियों में इसका फायदा उठाने के लिए तैयार बैठी थी।