सीनियर खिलाड़ियों की अनदेखी और लगातार प्रयोग, क्या यही है भारतीय क्रिकेट के पतन की वजह?

Gautam Gambhir Strategy: भारतीय क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों से बदलाव के दौर से गुजर रही है, लेकिन गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद टीम के प्रदर्शन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

कई अहम सीरीज में हार, टीम चयन में बार-बार बदलाव, सीनियर खिलाड़ियों की अनदेखी और हर मैच में नए प्रयोगों ने भारतीय क्रिकेट को अस्थिर बना दिया है।

क्रिकेट जगत के कई पूर्व दिग्गज भी गंभीर की रणनीतियों पर खुलकर सवाल उठा चुके हैं।

निरंतर बदलाव का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ा

गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण सीरीज गंवाई हैं। टीम संयोजन में निरंतर बदलाव के कारण खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट नहीं दिखे।

कभी बल्लेबाजी क्रम बदला गया तो कभी गेंदबाजी आक्रमण में लगातार फेरबदल हुआ।

ऐसे प्रयोगों का असर टीम के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दिया।

सीनियर खिलाड़ियों की अनदेखी बनी परेशानी

सबसे अधिक चर्चा सीनियर खिलाड़ियों की अनदेखी को लेकर हो रही है।

अनुभवी खिलाड़ियों को आराम, रोटेशन या भविष्य की योजना के नाम पर बाहर रखा गया, जबकि युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर दिए गए।

युवाओं को मौका देना किसी भी टीम के भविष्य के लिए जरूरी है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका पूरी तरह कम कर देना क्रिकेट विशेषज्ञों को सही नहीं लग रहा।

रोहित शर्मा और विराट कोहली ने लिया संन्यास

भारतीय टीम के सफल कप्तानों में एक रोहित शर्मा और चेस मास्टर विराट कोहली को टीम में अनेदेखा करने की कवायद शुरू हुई।

रोहित शर्मा के शानदार फॉर्म में होने के बावजूद उनसे कप्तानी छीन ली गयी।

विवादों के बाद रोहित और विराट ने टेस्ट और टी-20 को अलविदा कह दिया।

अब रोहित को वनडे टीम से भी बाहर करने की चर्चा की जा रही है।

जबकि रोहित ने इंग्लैंड में शतक ठोंक सभी को करारा जवाब दिया।

रविंद्र जाडेजा, शमी और सिराज को गायब कर दिया गया

युवा ऑलराउंडरों में भविष्य तलाशने के चक्कर में अनुभवी रविंद्र जाडेजा को वनडे मुकाबलों से दरकिनार कर दिया गया।

शानदार फॉर्म में होने के बावजूद तेज गेंदबाज और स्विंग मास्टर मोहम्मद शमी को बाहर रखा जा रहा है।

वहीं अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी टी-20 स्क्वायड और वनडे टीम से बाहर कर दिये गये हैं।

इसका असर न सिर्फ आयरलैंड में देखने को मिला बल्कि इंग्लैंड में भी टीम इंडिया का बुरा हाल रहा।

टीम संयोजन में विफलता हासिल हो रही

भारतीय टीम में लगातार प्रयोगों के कारण स्थायी प्लेइंग इलेवन भी नहीं बन सकी।

एक सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को अगली सीरीज में बाहर बैठना पड़ा, जबकि कई नए खिलाड़ियों को बिना पर्याप्त अनुभव के बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं।

इससे टीम में स्थिरता की कमी साफ नजर आई।

पूर्व क्रिकेटरों ने भी कई मौकों पर टीम चयन और रणनीति पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

उनका मानना है कि किसी भी सफल टीम की पहचान एक संतुलित संयोजन और खिलाड़ियों पर भरोसा होती है।

लगातार बदलाव खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं और टीम के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर डालते हैं।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी टीम ने बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, तब टीम संयोजन काफी हद तक स्थिर रहा है।

खिलाड़ियों को लंबा अवसर मिला और उनकी भूमिकाएं स्पष्ट थीं।

वर्तमान दौर में बार-बार हो रहे प्रयोगों के कारण यह स्थिरता दिखाई नहीं दे रही।

हालांकि यह भी सच है कि भारतीय क्रिकेट एक संक्रमण काल से गुजर रहा है।

भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने के लिए कुछ कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि क्या लगातार प्रयोग ही इसका सही तरीका है?

क्रिकेट के जानकार मानते हैं कि युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाकर ही भारत दोबारा विश्व क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान कायम कर सकता है।

आने वाले महीनों में भारतीय टीम के सामने कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां हैं।

सबसे बड़ी चुनौती अगले साल होने वाला एकदिवसीय विश्व कप है।

ऐसे में गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे प्रयोगों से आगे बढ़कर एक स्थिर और संतुलित टीम तैयार करें।

ताकि भारत फिर से लगातार जीत की राह पर लौट सके।