National Madhukar Ceremony: साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रांची की लेखिका अंशिता सिन्हा को मध्यप्रदेश के दतिया में आयोजित राष्ट्रीय मधुकर समारोह में प्रतिष्ठित ‘शब्द आराधना सम्मान’ से विभूषित किया गया।
साहित्य और कला जगत से जुड़े देशभर के कई प्रतिष्ठित लोगों की मौजूदगी में आयोजित इस समारोह में अंशिता सिन्हा को सम्मानित किया गया।
अंशिता सिन्हा को यह सम्मान दतिया राजघराने के महाराजा गोविंद देव जूदेव, महारानी परिणिता राजे, INTACH के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर तथा कार्यक्रम के संयोजक विनोद मिश्र ‘सुरमणि’ के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद अंशिता सिन्हा ने इसे साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
साहित्य के क्षेत्र में लगातार सक्रिय अंशिता अपनी लेखनी के माध्यम से कहानी, कविता और संपादन के क्षेत्र में योगदान देती रही हैं।
‘ख्वाबों के रेशमी साये’ का हुआ विमोचन
राष्ट्रीय मधुकर समारोह के दौरान अंशिता सिन्हा के कहानी संग्रह ‘ख्वाबों के रेशमी साये’ का भी विमोचन किया गया।
इसके साथ ही उनके संपादन में प्रकाशित आलेख संग्रह ‘सत्यं शिवम् सुन्दरम’ भी समारोह में लोकार्पित हुआ।
‘सत्यं शिवम् सुन्दरम’ संग्रह भारत के शिव मंदिरों पर आधारित आलेखों का महत्वपूर्ण संकलन है।
इस पुस्तक में देश के विभिन्न शिव मंदिरों, उनकी परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को आलेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
बताया गया कि साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से ‘शब्द आराधना सम्मान’ प्रदान किया जाता है।
अंशिता सिन्हा पिछले कई वर्षों से साहित्य जगत में निरंतर सक्रिय हैं।
अब तक उनकी 5 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें एक कहानी संग्रह और चार काव्य संग्रह शामिल हैं।
इसके अलावा वह कई साझा साहित्यिक संग्रहों का संपादन भी कर चुकी हैं।
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है।
सुषमा को मिला ‘शिव सारस्वत सम्मान’
राष्ट्रीय मधुकर समारोह में रांची की सुषमा को भी साहित्यिक योगदान के लिए ‘शिव सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें ‘सत्यं शिवम् सुन्दरम’ आलेख संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।
शिक्षण के क्षेत्र से जुड़ी सुषमा संगीत और लेखन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रही हैं।
साहित्य और कला के प्रति उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रीय मधुकर समारोह में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े देशभर के कई जाने-माने लोगों ने हिस्सा लिया।
समारोह ने साहित्यकारों और रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के प्रति नई पीढ़ी को जोड़ने का संदेश भी दिया।
