क्या झारखंड के शिक्षा विभाग की कुर्सी बन गई है मनहूस? तीन मंत्रियों की मौत से उठे रहस्यमयी सवाल

Education Department’s chair become jinxed: झारखंड की राजनीति में एक ऐसा संयोग सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल बेहद अजीब है।

क्या झारखंड में शिक्षा से जुड़े विभागों की मंत्री वाली कुर्सी मनहूस है?

जाहिर है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं को एक साथ रखकर देखें तो कहानी जरूर असामान्य नजर आती है।

एक के बाद दूसरा चेहरा।

और फिर तीसरा।

और तीनों नामों के साथ जुड़ी है- शिक्षा।

कहानी शुरू होती है जगरनाथ महतो से

झारखंड के वरिष्ठ जेएमएम नेता और तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के अस्पताल में निधन हुआ था।

कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था और 2020 में उनका लंग ट्रांसप्लांट भी हुआ था।

बाद में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उन्हें फिर चेन्नई ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

महतो के निधन के बाद उनके पास रहा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग खाली हुआ।

जुलाई 2023 में उनकी पत्नी बेबी देवी ने मंत्री पद की शपथ ली।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

फिर आया रामदास सोरेन का नाम

2024 में हेमंत सोरेन सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद रामदास सोरेन को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी मिली।

लेकिन कुछ ही महीनों बाद एक और दर्दनाक घटना सामने आई।

2 अगस्त 2025 को रामदास सोरेन अपने आवास के बाथरूम में गिर गए।

उनके सिर में गंभीर चोट लगी और उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया।

लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया।

एक बार फिर शिक्षा विभाग की कुर्सी खाली हो गई।

और अब तीसरा नाम- सुदिव्य कुमार सोनू

हेमंत सोरेन सरकार के मौजूदा कार्यकाल में शिक्षा से जुड़े विभाग का एक और महत्वपूर्ण नाम था सुदिव्य कुमार सोनू।

उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ शहरी विकास एवं आवास और पर्यटन, कला, संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली थी।

और अब 6 सितंबर 2026 को उनके अचानक निधन की खबर ने पूरे झारखंड को स्तब्ध कर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक उनकी तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां कार्डियक अरेस्ट के बाद उनकी मौत हो गई।

क्या ये है रहस्यमयी संयोग?

यहां से इस पूरी कहानी का सबसे रहस्यमयी संयोग सामने आता है।

जगरनाथ महतो

शिक्षा विभाग → गंभीर बीमारी → निधन

रामदास सोरेन

स्कूली शिक्षा विभाग → अचानक गिरने से गंभीर चोट → निधन

सुदिव्य कुमार सोनू

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा → अचानक तबीयत बिगड़ी → निधन

तीनों की परिस्थितियां अलग हैं।

तीनों की चिकित्सा संबंधी वजहें अलग हैं।

और यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।

इन घटनाओं को किसी रहस्यमय शक्ति, अंधविश्वास या मनहूस कुर्सी से जोड़ने का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

फिर भी…

एक संयोग ऐसा है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है।

तीन अलग नेता।
तीन अलग घटनाएं।
और शिक्षा से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी।

एक गए, दूसरे आए।

दूसरे गए, तीसरे आए।

और अब तीसरा नाम भी उसी दुखद कहानी का हिस्सा बन गया।

क्या सचमुच कुर्सी में कोई रहस्य है?

शिक्षा विभाग से जुड़ी कुर्सी में क्या कोई रहस्य है? शायद नहीं।

क्योंकि किसी भी विभाग की कुर्सी किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनती है, ऐसा साबित करने वाला कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

लेकिन राजनीति में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें आंकड़ों से समझाया जा सकता है।

फिर भी उनका संयोग लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है।

झारखंड में शिक्षा से जुड़े इन तीन मंत्रियों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

यह अंधविश्वास की कहानी नहीं है।

यह किसी श्राप की कहानी नहीं है।

लेकिन,

यह एक ऐसा असामान्य राजनीतिक संयोग जरूर है, जिसे झारखंड लंबे समय तक याद रखेगा।

और शायद इसी वजह से सवाल फिर भी हवा में तैरता रहेगा।

क्या वाकई शिक्षा विभाग की कुर्सी में कुछ अजीब है, या यह सिर्फ तीन बेहद दर्दनाक घटनाओं का संयोग है?