ईस्ट जोन ने रचा इतिहास, 13 साल बाद जीती दलीप ट्रॉफी, ईशान किशन की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन

Duleep Trophy Final: चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन ने इतिहास रच दिया।

ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन टीम ने 13 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया।

फाइनल मुकाबला ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन पहली पारी में मिली विशाल बढ़त ने ईस्ट जोन को चैंपियन बना दिया।

ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में साउथ जोन की टीम 336 रन पर सिमट गई।

इस तरह ईस्ट जोन को पहली पारी में 372 रन की निर्णायक बढ़त मिली। फाइनल के नियमों के अनुसार मैच ड्रॉ रहने पर पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है।

ईशान किशन की कप्तानी पारी ने बदला मैच

ईस्ट जोन की ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक रहे कप्तान ईशान किशन।

किशन ने पहली पारी में महज आक्रामक नहीं बल्कि बेहद प्रभावशाली अंदाज में 270 रन बनाए।

उनकी पारी में 30 चौके और 7 छक्के शामिल रहे।

यह पारी ईस्ट जोन के 708 रन के विशाल स्कोर की नींव बनी।

इसके बाद दूसरी पारी में भी किशन ने 80 रन बनाए।

यानी पूरे फाइनल में उनके बल्ले से कुल 350 रन निकले।

इसी शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

कुमार कुशाग्र ने संभाला मोर्चा

ईस्ट जोन के विशाल स्कोर में कुमार कुशाग्र का योगदान भी बेहद अहम रहा। उन्होंने पहली पारी में 101 रन की शानदार शतकीय पारी खेली।

किशन के साथ उनकी साझेदारी ने साउथ जोन के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया और ईस्ट जोन को 700 के पार पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

शिखर मोहन और अभिमन्यु ईश्वरन ने दी मजबूत शुरुआत

ईस्ट जोन की पारी को शुरुआत में ही मजबूती देने का काम शिखर मोहन और अभिमन्यु ईश्वरन ने किया।

शिखर मोहन ने 85 रन, जबकि अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रन बनाए।

दोनों की उपयोगी पारियों ने टीम को मजबूत आधार दिया और बाद में किशन और कुशाग्र ने उसका पूरा फायदा उठाया।

दूसरी पारी में कुनैन कुरैशी का शतक

पहली पारी की बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद भी ईस्ट जोन ने दूसरी पारी में बल्लेबाजी जारी रखी और 7 विकेट पर 388 रनों का स्कोर बनाया।

इस पारी में मोहम्मद कुनैन कुरैशी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 116 रन बनाए।

उनके साथ अनुकूल रॉय ने भी 64 रन की उपयोगी पारी खेली।

इससे ईस्ट जोन ने मैच पर अपनी पकड़ पूरी तरह बनाए रखी।

गेंदबाजी में शमी और मुकेश का अनुभव आया काम

ईस्ट जोन की जीत सिर्फ बल्लेबाजों की कहानी नहीं रही।

गेंदबाजों ने भी दबाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अनुभवी मोहम्मद शमी ने अपने अनुभव और सटीक गेंदबाजी से साउथ जोन के बल्लेबाजों को परेशान किया।

उनके साथ मुकेश कुमार ने भी प्रभावी गेंदबाजी की।

दोनों की अनुशासित गेंदबाजी ने साउथ जोन को ईस्ट जोन के 708 रन के स्कोर के करीब पहुंचने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साउथ जोन की कोशिश, लेकिन 372 रन की दीवार

साउथ जोन की पहली पारी में कप्तान तिलक वर्मा ने 99 रन बनाकर संघर्ष किया।

जबकि देवदत्त पडिक्कल ने 62 रन बनाए।

लेकिन पूरी टीम 336 रन पर सिमट गई।

तिलक वर्मा को पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।

13 साल बाद लौटी ट्रॉफी

ईस्ट जोन ने इससे पहले दलीप ट्रॉफी का खिताब 2012-13 सीजन में जीता था।

इसके बाद लंबे समय तक टीम ट्रॉफी से दूर रही।

अब 2026 में ईशान किशन की कप्तानी में मिली यह जीत ईस्ट जोन के लिए सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि लंबे इंतजार के अंत की कहानी है।