Bihar and Jharkhand shine in the Duleep Trophy: दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन ने 13 साल बाद खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 372 रन की विशाल बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन को चैंपियन घोषित किया गया।
इस ऐतिहासिक सफलता में बिहार और झारखंड से जुड़े खिलाड़ियों का शानदार योगदान रहा।
ईस्ट जोन की जीत के सबसे बड़े नायक रहे झारखंड के कप्तान ईशान किशन।
उन्होंने पहली पारी में तूफानी अंदाज में 270 रन बनाए और दूसरी पारी में भी 80 रन की पारी खेली।
इस तरह पूरे फाइनल में ईशान के बल्ले से 350 रन निकले और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
कुमार कुशाग्र का शानदार शतक
झारखंड के ही युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र ने भी फाइनल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
उन्होंने पहली पारी में शानदार 101 रन बनाए।
ईशान और कुशाग्र के शतकों ने ईस्ट जोन को पहली पारी में 708 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
कुनैन कुरैशी ने दूसरी पारी में जड़ा नाबाद शतक
झारखंड के कुनैन कुरैशी इस फाइनल की दूसरी पारी के बड़े सितारे बनकर उभरे।
उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 116 रन बनाए।
उनकी पारी ने ईस्ट जोन को दूसरी पारी में भी मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि इतने बड़े मंच पर उन्होंने जबरदस्त संयम और आत्मविश्वास दिखाया।
अनुकूल रॉय ने भी बल्ले से छोड़ी छाप
झारखंड के ऑलराउंडर अनुकूल रॉय ने भी फाइनल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पहली पारी में उन्होंने 45 रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में मुश्किल परिस्थितियों में शानदार 64 रन की पारी खेली।
इस तरह अनुकूल ने बल्ले से कुल 109 रन जोड़े।
उनकी दूसरी पारी की 64 रन की उपयोगी पारी ने ईस्ट जोन की बढ़त को और मजबूत किया।
यानी फाइनल में झारखंड के बल्लेबाजों का दबदबा साफ नजर आया।
ईशान किशन 270, कुमार कुशाग्र 101, अनुकूल रॉय 45 और 64, जबकि कुनैन कुरैशी ने दूसरी पारी में नाबाद 116 रन बनाकर ईस्ट जोन की जीत में अहम भूमिका निभाई।
बिहार के वैभव सूर्यवंशी भी रहे टीम का हिस्सा
बिहार के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी भी ईस्ट जोन की चैंपियन टीम का हिस्सा रहे।
उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई।
फाइनल की पहली पारी में उन्होंने 44 रन बनाए।
टूर्नामेंट में पांच पारियों से उनके खाते में 192 रन रहे।
बिहार-झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि
ईस्ट जोन की यह खिताबी जीत सिर्फ एक ट्रॉफी की जीत नहीं है।
यह बिहार और झारखंड की क्रिकेट प्रतिभाओं के बढ़ते कद का भी प्रमाण है।
एक तरफ ईशान किशन ने कप्तान और बल्लेबाज के तौर पर नेतृत्व किया, तो दूसरी तरफ कुशाग्र, कुनैन कुरैशी और अनुकूल रॉय ने बल्ले से अपनी छाप छोड़ी।
बिहार के वैभव सूर्यवंशी की मौजूदगी ने इस जीत को और खास बना दिया।
दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन का जलवा रहा, लेकिन बिहार-झारखंड के लिए यह फाइनल उससे भी बड़ी कहानी लिख गया।
यहां प्रतिभा भी है, अनुभव भी है और भविष्य की उम्मीद भी।
