सुप्रीम कोर्ट का बिहार क्रिकेट एसोसिएशन पर बड़ा फैसला, जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह बने प्रशासक, 18 सितंबर की प्रस्तावित AGM पर भी रोक

Bihar Cricket Association: बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के प्रशासन से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह को बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का नया प्रशासक नियुक्त कर दिया।

यह नियुक्ति पहले नियुक्त किए गए ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह द्वारा निजी कारणों से जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताए जाने के बाद की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने BCA के कामकाज को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

अदालत ने नए प्रशासक के पदभार संभालने तक BCA की वार्षिक आमसभा (AGM) आयोजित करने पर भी रोक लगा दी है।

ऐसे में 18 सितंबर को प्रस्तावित आमसभा का आयोजन अब नहीं किया जा सकेगा।

पहले चक्रधारी शरण सिंह को बनाया गया था प्रशासक

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 अगस्त के अपने आदेश में ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह को BCA का प्रशासक नियुक्त किया था।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकपाल रहे पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एल. नागेश्वर राव की विस्तृत रिपोर्ट और उनकी सिफारिशों के आधार पर लिया गया था।

हालांकि, जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताई।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने BCA के प्रशासन को लेकर स्थिति फिर आई और अदालत ने अब जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी है।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी उठे थे गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त के आदेश में जस्टिस एल. नागेश्वर राव की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया था।

रिपोर्ट में BCA के चुनाव और उसके इलेक्टोरल कॉलेज से जुड़े कई पहलुओं की जांच की गई थी।

रिपोर्ट में जिला क्रिकेट संघों (DCA) के क्लबों के सत्यापन, निर्वाचित निकायों को हटाने और नई तदर्थ समितियों के गठन सहित कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए थे।

लोकपाल ने सुझाव दिया था कि जिला क्रिकेट संघों के क्लबों का व्यापक सत्यापन कराया जाए और उसके बाद BCA के इलेक्टोरल कॉलेज को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाए।

लोकपाल की सिफारिश में यह भी कहा गया था कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित नियमों के अनुसार DCA और BCA के चुनाव कराए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त के आदेश में इन सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया था।

अब प्रशासक की भूमिका अहम

नए आदेश के बाद BCA के प्रशासन में जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

अदालत ने पहले नियुक्त प्रशासक के स्थान पर नई नियुक्ति करते हुए BCA के कामकाज को अदालत द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की व्यवस्था की है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर BCA की प्रशासनिक गतिविधियों, जिला क्रिकेट संघों के सत्यापन और भविष्य की चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।

क्या है पूरा मामला?

BCA के प्रशासन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले लोकपाल की नियुक्ति कर मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कराई।

लोकपाल की रिपोर्ट के बाद अदालत ने प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया।

अब पहले नियुक्त प्रशासक के पद संभालने से इनकार के बाद जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई है।

इससे साफ है कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का प्रशासन और उसकी चुनावी प्रक्रिया फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रही है।

आने वाले समय में प्रशासक द्वारा की जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया और उसके बाद चुनावी व्यवस्था में होने वाले बदलाव इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।