JDU के अनंत सिंह आखिर नीरज कुमार पर क्यों उखड़े? 11 साल पुरानी अदावत की क्या है पूरी कहानी

Anant Singh Vs Neeraj Kumar: बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के MLC चुनाव को लेकर चल रही खींचतान अब खुली राजनीतिक लड़ाई में बदल गई है।

मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी और मौजूदा MLC नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।

अनंत सिंह ने नीरज कुमार को चुनाव में हराने की बात कही है और उनके समर्थन के बजाय डॉ. अनुज कुमार के पक्ष में खड़े होने का ऐलान किया है।

मामला सिर्फ टिकट या मौजूदा MLC चुनाव का नहीं दिखता।

दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव की जड़ें कई साल पीछे जाती हैं।

2015 के पुटूस हत्याकांड से लेकर 2019 के AK-47 मामले और फिर हाल के बयानों तक, दोनों के बीच रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।

यहां से शुरू हुई खुली राजनीतिक अदावत

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच टकराव को समझने के लिए 2015 की राजनीति पर लौटना जरूरी है।

पुटूस हत्याकांड के बाद जून 2015 में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई।

इसके बाद मोकामा की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

नवंबर 2015 के विधानसभा चुनाव में JDU ने अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया और नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया।

अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे और चुनाव जीत गए।

उस दौर में नीरज कुमार ने अनंत सिंह के खिलाफ तीखे राजनीतिक बयान दिए थे।

यही दौर दोनों के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक दूरी बढ़ने की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।

2019 का AK-47 मामला बना बड़ा मोड़

अगस्त 2019 में अनंत सिंह के पैतृक आवास लदमा से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया।

इस मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई।

अब 2026 में यही मामला दोनों नेताओं की जुबानी जंग में फिर लौट आया है।

अनंत सिंह ने हाल में आरोप लगाया कि उन्हें फंसाने के लिए AK-47 रखवाया गया था और इसके पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी।

इस पर नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर अनंत सिंह के पास कोई सबूत है तो उन्हें अदालत जाना चाहिए।

उन्होंने नार्को टेस्ट को लेकर भी चुनौती दी।

‘पुदीना सिंह’ वाले तंज ने बढ़ाई दूरी

दोनों के बीच विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं रहा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नीरज कुमार द्वारा अनंत सिंह के लिए ‘पुदीना सिंह’ जैसे तंज का इस्तेमाल भी दोनों के बीच कटुता बढ़ाने वाला कारण बना।

राजनीति में बयान कई बार चुनाव खत्म होने के बाद भी याद रहते हैं और मोकामा की स्थानीय राजनीति में इस तरह की व्यक्तिगत बयानबाजी ने दोनों नेताओं के बीच दूरी को और गहरा किया।

JDU में लौटे अनंत सिंह, लेकिन रिश्ते नहीं सुधरे

समय बदला और अनंत सिंह फिर JDU के साथ आ गए, लेकिन दोनों नेताओं के बीच पुरानी तल्खी खत्म नहीं हुई।

अनंत सिंह की शिकायत यह भी रही कि जब उनके खिलाफ नीरज कुमार लगातार राजनीतिक बयान देते रहे, तब पार्टी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

और अब जब वे नीरज कुमार के खिलाफ खड़े हैं, तो पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें समझाने की कोशिश क्यों हो रही है।

चुनाव प्रचार ने फिर खोल दिए पुराने घाव

पटना स्नातक सीट के मौजूदा चुनाव में यह टकराव खुलकर सामने आया।

अनंत सिंह ने नीरज कुमार का समर्थन करने से इनकार कर दिया और डॉ. अनुज कुमार को समर्थन देने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि उनका विरोध JDU से नहीं बल्कि नीरज कुमार से है।

इसके बाद नीरज कुमार ने भी पलटवार किया।

विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच AK-47 मामले और नार्को टेस्ट को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई।

सिर्फ व्यक्तिगत लड़ाई या मोकामा के वर्चस्व की?

मोकामा और आसपास के इलाके में अनंत सिंह की लंबे समय से मजबूत राजनीतिक मौजूदगी रही है।

दूसरी ओर नीरज कुमार JDU के संगठन और राजनीतिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

पटना स्नातक सीट का चुनाव इन दोनों प्रभाव क्षेत्रों के टकराव का नया मंच बन गया है।

अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में अपने समर्थकों को डॉ. अनुज कुमार के पक्ष में लामबंद करने की बात कही है।

नीतीश कुमार के सामने बड़ी चुनौती

अनंत सिंह के खुले विरोध के बाद JDU नेतृत्व ने दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की कोशिश की।

सितंबर की शुरुआत में दोनों नेताओं की पार्टी स्तर पर बैठक भी हुई थी, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

शुक्रवार को अनंत सिंह ने फिर नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर बयान दिया और उन्हें चुनाव में हराने की बात कही।

नीरज कुमार ने भी इसका करारा जवाब दिया।

इससे साफ है कि फिलहाल विवाद सिर्फ बंद कमरे की नाराजगी नहीं रह गया है।

बहरहाल अनंत सिंह और नीरज कुमार की मौजूदा लड़ाई को केवल एक MLC चुनाव का विवाद मानना अधूरा होगा।

इसकी पृष्ठभूमि में 2015 से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, पुराने सार्वजनिक बयान, 2019 का AK-47 मामला और मोकामा क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा जैसे कई अध्याय हैं।

लेकिन एक बात स्पष्ट है कि इस समय टकराव का सबसे बड़ा मंच पटना स्नातक MLC चुनाव बन चुका है।

अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खड़े हैं, जबकि JDU नेतृत्व इस विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना यह है कि यह व्यक्तिगत राजनीतिक टकराव चुनाव तक सीमित रहता है या JDU के भीतर इसके व्यापक राजनीतिक असर सामने आते हैं।