Vedtimes.com | राजनीति डेस्क
Seat sharing arithmetic SP and Congress: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन चुनावी तैयारियों के साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का गणित चर्चा में आ गया है।
एक तरफ कांग्रेस गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने करीब 350 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी तैयारी तेज करने के संकेत दिए हैं।
अगर दोनों आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो संख्या 500 पहुंचती है, जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं।
हालांकि, 350 और 150 को अंतिम सीट बंटवारा समझना सही नहीं होगा।
ये फिलहाल दोनों दलों की चुनावी तैयारी और दावेदारी के संकेत हैं।
कांग्रेस की बड़ी दावेदारी
यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि कांग्रेस के पास सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की तैयारी है और गठबंधन में पार्टी कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
उन्होंने सीट शेयरिंग को अक्टूबर में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद जताई थी।
हालांकि गौतम ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीटों की अंतिम संख्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा।
यानी 150 का आंकड़ा अभी अंतिम समझौता नहीं है।
SP की 350 सीटों पर तैयारी
दूसरी ओर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने 403 में से करीब 350 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन और चुनावी तैयारी तेज करने के संकेत दिए हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक करीब 300 संभावित उम्मीदवारों की पहचान और 300-330 सीटों पर तैयारी की बात भी सामने आई है, जबकि नेतृत्व ने लगभग 350 सीटों पर तैयारी का संकेत दिया है।
SP का तर्क यह है कि सीटों का बंटवारा केवल लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन, जमीनी ताकत और जीत की संभावना को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
2024 का लोकसभा चुनाव बनेगा आधार?
2024 के लोकसभा चुनाव में SP और कांग्रेस ने यूपी में गठबंधन करके चुनाव लड़ा था।
SP ने 37 सीटें, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं।
दोनों दलों की संयुक्त संख्या 43 रही।
कांग्रेस इसी प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में अपनी बड़ी भूमिका के आधारों में से एक मान सकती है।
लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव का गणित अलग होता है।
एक लोकसभा क्षेत्र में कई विधानसभा सीटें होती हैं और किसी संसदीय सीट पर गठबंधन की जीत का मतलब यह नहीं कि उसी क्षेत्र की हर विधानसभा सीट पर दोनों दलों की ताकत समान हो।
यही वजह है कि सीट शेयरिंग में 2024 के आंकड़ों के साथ-साथ विधानसभा स्तर की जमीनी स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
53-55 सीटों की चर्चा ने बढ़ाई हलचल
सूत्रों की मानें तो SP, कांग्रेस को लगभग 53 से 55 सीटों की पेशकश पर विचार कर रही है।
अगर यह आंकड़ा बातचीत की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, तो कांग्रेस की 150 सीटों की मांग और SP की संभावित पेशकश के बीच काफी बड़ा अंतर दिखाई देता है।
कांग्रेस ने भी बदली अपनी टीम
इसी बीच कांग्रेस ने यूपी संगठन में बड़ा बदलाव किया है।
अराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी ने अन्य संगठनात्मक नियुक्तियां भी की हैं।
इन बदलावों को 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
असली परीक्षा सीटों की मेज पर
अखिलेश यादव ने भी हालिया बयान में सीटों की संख्या से ज्यादा गठबंधन की जीत को महत्वपूर्ण बताया है।
इससे संकेत मिलता है कि दोनों दलों के बीच बातचीत में सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि जीतने योग्य सीटों का सवाल भी अहम रहेगा।
यूपी की राजनीति में गठबंधन सिर्फ मंच साझा करने से नहीं बनता।
गठबंधन असल में टिकट बांटने की मेज पर बनता है।
