Vedtimes.com | स्पोर्ट्स डेस्क
Indian challenge ends in the Denmark Open: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों का BWF डेनमार्क ओपन सुपर 750 में अभियान निराशाजनक अंत के साथ समाप्त हो गया।
शुक्रवार को खेले गए मुकाबलों में महिला युगल जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को हार का सामना करना पड़ा, जबकि महिला एकल में युवा भारतीय खिलाड़ी तन्वी शर्मा भी दुनिया की नंबर-1 शटलर आन से-यंग के सामने चुनौती पेश करने के बावजूद जीत दर्ज नहीं कर सकीं।
पुरुष एकल में किदांबी श्रीकांत का सफर भी दूसरे दौर में ही समाप्त हो गया।
ट्रीसा-गायत्री की वापसी बेअसर, मलेशियाई जोड़ी ने जीता मुकाबला
महिला युगल में भारत की ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद का सामना मलेशिया की पेर्ली टैन और थिनाह मुरलीधरन से हुआ। भारतीय जोड़ी ने दूसरे गेम में वापसी करते हुए मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचाया, लेकिन तीसरे गेम में मलेशियाई खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।
मुकाबले में ट्रीसा-गायत्री को 14-21, 21-17, 11-21 से हार का सामना करना पड़ा।
पहला गेम गंवाने के बाद भारतीय जोड़ी ने दूसरे गेम में दमदार खेल दिखाया और मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगाई।
हालांकि, निर्णायक गेम में मलेशियाई जोड़ी ने दबाव के बीच अपनी लय बनाए रखी और मैच अपने नाम कर लिया।
तन्वी शर्मा को विश्व नंबर-1 आन से-यंग ने हराया
महिला एकल में युवा भारतीय खिलाड़ी तन्वी शर्मा के सामने दक्षिण कोरिया की स्टार शटलर और विश्व नंबर-1 आन से-यंग की चुनौती थी।
आन से-यंग ने अपने अनुभव और निरंतरता का परिचय देते हुए सीधे गेमों में जीत दर्ज की।
तन्वी शर्मा को 15-21, 13-21 से हार मिली।
इस परिणाम के साथ महिला एकल में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई।
दुनिया की शीर्ष खिलाड़ी के खिलाफ मुकाबला तन्मी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता परखने का अहम अवसर रहा।
किदांबी श्रीकांत भी दूसरे दौर में हुए बाहर
पुरुष एकल में अनुभवी भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत भी टूर्नामेंट में आगे बढ़ने में सफल नहीं रहे।
उनका अभियान दूसरे दौर में समाप्त हो गया।
इसके साथ ही डेनमार्क ओपन में भारतीय पुरुष एकल खिलाड़ियों की चुनौती भी खत्म हो गई।
भारतीय बैडमिंटन के लिए सीख और आगे की चुनौती
डेनमार्क ओपन जैसे सुपर 750 स्तर के टूर्नामेंट में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला करना भारतीय शटलरों के लिए महत्वपूर्ण अनुभव है।
हालांकि, इस बार भारतीय खिलाड़ियों को निर्णायक मौकों पर बेहतर प्रदर्शन करने और लगातार खेल में सुधार करने की जरूरत महसूस हुई।
ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की दूसरे गेम में वापसी ने उनकी संघर्ष क्षमता दिखाई, लेकिन निर्णायक गेम में मिली हार ने उनकी चुनौती समाप्त कर दी। वहीं, तन्वी शर्मा के लिए आन से-यंग जैसी शीर्ष खिलाड़ी के खिलाफ खेलना भविष्य की तैयारी के लिहाज से अहम अनुभव रहा।
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