रांची में 249 रन भी नहीं बचा सका भारत, शाई होप-रदरफोर्ड ने वेस्टइंडीज को दिलाई ऐतिहासिक जीत

Vedtimes.com | स्पोर्ट्स डेस्क
वेस्टइंडीज ने भारत को 6 विकेट से हराया।
पुरुष टी-20 इंटरनेशनल में दर्ज किया दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज

India failed to defend even 249 runs: रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में शुक्रवार को खेले गए दूसरे टी-20 मुकाबले में भारतीय टीम को ऐसी हार का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह सिर्फ गेंदबाजों की नाकामी नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज की असाधारण बल्लेबाजी भी रही।

भारत ने संजू सैमसन की 82 रन की तूफानी पारी और मध्यक्रम के विस्फोटक प्रदर्शन की बदौलत 20 ओवर में पांच विकेट पर 249 रन बनाए।

जवाब में वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप के नाबाद शतक और शेरफेन रदरफोर्ड की आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर 18.3 ओवर में चार विकेट पर 252 रन बनाकर मुकाबला छह विकेट से जीत लिया।

इस जीत के साथ पांच मैचों की टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर हो गई।

संजू सैमसन ने खेली 82 रनों की तूफानी पारी

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को संजू सैमसन और ईशान किशन ने मजबूत शुरुआत दिलाई।

संजू ने 41 गेंदों में 82 रन बनाए, जिसमें नौ चौके और चार छक्के शामिल रहे। वहीं, ईशान किशन ने 22 गेंदों पर 43 रन बनाकर कैरेबियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

अभिषेक शर्मा ने 12 गेंदों में 20 रन का योगदान दिया।

हालांकि, रोस्टन चेज ने 3 विकेट लेकर भारतीय पारी की रफ्तार पर अंकुश लगाने की कोशिश की।

अंतिम ओवरों में श्रेयस अय्यर और तिलक वर्मा ने आक्रामक बल्लेबाजी की।

अय्यर ने 18 गेंदों में 40 रन बनाए, जबकि तिलक वर्मा 18 गेंदों में 44 रन बनाकर नाबाद रहे।

दोनों के बीच 83 रन की तेज साझेदारी हुई।

भारतीय टीम 249 रन तक पहुंच गई, लेकिन यह विशाल स्कोर भी जीत की गारंटी साबित नहीं हुआ।

शुरुआती झटकों के बाद शाई होप का पलटवार

250 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद खराब रही।

मयंक यादव ने शुरुआती ओवर में ही दो विकेट लेकर भारतीय खेमे में जीत की उम्मीद जगा दी।

इसके बाद उन्होंने रोवमैन पॉवेल को भी आउट किया।

वेस्टइंडीज का स्कोर 58 रन पर तीन विकेट हो गया था।

लेकिन इसके बाद कप्तान शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड ने मैच की दिशा बदल दी।

दोनों ने चौथे विकेट के लिए 120 रन की साझेदारी कर भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया।

शाई होप ने 45 गेंदों में नाबाद 102 रन बनाए।

उनकी पारी में 6 चौके और 9 छक्के शामिल रहे।

दूसरी ओर, रदरफोर्ड ने 37 गेंदों में 84 रन ठोक दिए, जिसमें सात चौके और सात छक्के शामिल थे।

रदरफोर्ड के आउट होने के बाद रोमारियो शेफर्ड ने 13 गेंदों में नाबाद 34 रन बनाकर वेस्टइंडीज की जीत सुनिश्चित कर दी।

होप ने छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया और टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

मयंक यादव सफल, बाकी गेंदबाजों ने किया निराश

भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो मयंक यादव सबसे प्रभावी रहे।

उन्होंने तीन ओवर में 36 रन देकर तीन विकेट लिए।

शुरुआती ओवर में उनके प्रदर्शन ने भारत को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था।

हालांकि, दूसरे छोर से गेंदबाजों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

अर्शदीप सिंह ने चार ओवर में 45 रन दिए, जबकि कुलदीप यादव ने चार ओवर में 53 रन खर्च किए।

अक्षर पटेल को 3.3 ओवर में 63 रन पड़े और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। शिवम दुबे ने दो ओवर में 30 रन दिए।

रांची में ओस और बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों ने गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ाईं।

गीली गेंद पर नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।

इसके बावजूद भारतीय टीम को मध्य ओवरों में साझेदारी तोड़ने और रन गति पर अंकुश लगाने के लिए बेहतर रणनीति की जरूरत थी।

249 रन बनाने के बाद भी कहां चूका भारत?

भारतीय टीम की हार का सबसे बड़ा कारण शुरुआती सफलता का फायदा नहीं उठा पाना रहा।

5 रन पर 2 विकेट गंवाने वाली वेस्टइंडीज को 58 रन पर तीसरा झटका भी लगा, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाज कोई प्रभावी दबाव नहीं बना सके।

रदरफोर्ड की बल्लेबाजी के दौरान मिले जीवनदान ने भी भारत की मुश्किल बढ़ाई।

मध्य ओवरों में विकेट नहीं मिलने से वेस्टइंडीज को बड़े शॉट खेलने की आजादी मिल गई।

इसके बाद शेफर्ड ने तेज रन बनाकर भारतीय टीम की वापसी की संभावनाएं खत्म कर दीं।

वेस्टइंडीज के नाम ऐतिहासिक रिकॉर्ड

रांची में मिली इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पुरुष टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज पूरा किया।

इस प्रारूप में इससे बड़ा सफल पीछा दक्षिण अफ्रीका ने 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 259 रन का लक्ष्य हासिल करके किया था।

वेस्टइंडीज की इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि आक्रामक बल्लेबाजी और मजबूत साझेदारी किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की राह खोल सकती है।

शाई होप और रदरफोर्ड ने दबाव में जिस तरह बल्लेबाजी की, वह इस मुकाबले का निर्णायक अंतर रहा।