Commonwealth Games India: आज से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरूआत हो रही है।
लेकिन इस संस्करण में खेलों की संख्या में की गई कटौती ने भारत की पदक संभावनाओं को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
आयोजन समिति ने कई ऐसे खेलों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया है, जिनमें भारत का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर भारत की कुल पदक संख्या पर पड़ सकता है।
कॉमनवेल्थ में आधे पदक इन्हीं खेलों में आये थे
पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने कुल 61 पदक जीते थे।
इनमें से 30 पदक उन खेलों से आए थे, जिन्हें अब इस संस्करण में शामिल नहीं किया गया है।
पिछले वाले के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भारत की सफलता का बड़ा हिस्सा उन्हीं खेलों पर आधारित था, जो अब प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं रहेंगे।
भारत ने वर्षों से कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और निशानेबाजी जैसे खेलों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।
खेलों की संख्या कम करने के पीछे आयोजन लागत, बुनियादी ढांचे और आयोजन को अधिक व्यावहारिक बनाने जैसे कारण बताए गये हैं।
लेकिन इस फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इससे प्रतियोगिता की प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन प्रभावित होगा।
कई देशों की तरह भारत भी उन खेलों में वर्षों से निवेश करता आया है, जिनमें उसके खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब नई चुनौतियां होंगी
इस बदलाव के बाद भारतीय खिलाड़ियों और खेल संघों के सामने अब नई चुनौतियां होंगी।
जिन खेलों को गेम्स में बरकरार रखा गया है, उनमें बेहतर प्रदर्शन कर पदक संख्या की भरपाई करनी होगी।
एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, हॉकी और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से अधिक उम्मीदें रहेंगी।
किसी भी बड़े खेल आयोजन में खेलों की सूची बदलना असामान्य नहीं है, लेकिन यदि किसी देश के मजबूत खेल लगातार बाहर होते हैं तो उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर हो सकती है।
आने वाले समय में भारतीय खेल के लिए यह जरूरी होगा कि वह खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित न रखकर उन खेलों में भी मजबूत बनाए जो भविष्य के कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई खेलों और ओलंपिक कार्यक्रम का स्थायी हिस्सा हैं।
साथ ही, जिन खेलों को इस बार बाहर रखा गया है, उनके खिलाड़ियों की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी भी जारी रखनी होगी ताकि उनका प्रदर्शन प्रभावित न हो।
कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या घटने का फैसला केवल प्रतियोगिता के स्वरूप में बदलाव नहीं है, बल्कि यह उन देशों के लिए भी रणनीतिक चुनौती है जो विशेष खेलों के दम पर पदक तालिका में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं।
भारत के लिए भी यह अवसर होगा कि वह बदलते परिदृश्य के अनुसार अपनी खेल नीति और तैयारी को नए सिरे से मजबूत करे।
