Vedtimes.com | स्पोर्ट्स डेस्क
Ranchi University’s New Sports Policy: रांची विश्वविद्यालय ने खेलों को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अब विश्वविद्यालय की खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल शहर या चुनिंदा कॉलेजों तक सीमित नहीं रहेगी।
अब गांवों, कस्बों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचकर नई प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी।
इसके बाद इन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं का अनुभव और आवश्यक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की बैठक में वर्ष 2026-27 के खेल कार्यक्रम, खिलाड़ियों के चयन, प्रशिक्षण, संसाधनों और प्रतियोगिताओं की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने स्पष्ट किया कि रांची विश्वविद्यालय में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें खोजने, तराशने और सही मंच देने की है।
गांव-कस्बों तक पहुंचेगा विश्वविद्यालय
नई पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि खेल प्रतिभा खोज का दायरा अब विश्वविद्यालय परिसर और बड़े शहरों से बाहर ले जाने पर जोर दिया जा रहा है।
झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा पारंपरिक रूप से हॉकी, फुटबॉल, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो जैसे खेलों से जुड़े रहे हैं।
लेकिन संसाधनों, प्रशिक्षण और सही अवसर की कमी के कारण अनेक प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पातीं।
रांची विश्वविद्यालय अब ऐसे खिलाड़ियों को पहचानकर उन्हें विश्वविद्यालय के खेल तंत्र से जोड़ने की दिशा में काम करेगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा ने भी दूरदराज के क्षेत्रों में प्रतिभाओं की खोज और उन्हें अवसर देने पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
सिर्फ ट्रायल नहीं, प्रतिभा को तराशने पर जोर
नई रणनीति में केवल खिलाड़ियों का चयन करना ही उद्देश्य नहीं है।
चयन के बाद उनकी क्षमता को विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सुमराय टेटे ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए 2 से 3 सप्ताह के विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की सलाह दी है।
उनका जोर इस बात पर है कि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग खेलों की प्रतिभाओं को खोजा जाए और उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए।
प्रतिभा खोज के साथ-साथ विश्वविद्यालय एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें खिलाड़ी को शुरुआती चयन के बाद भी लगातार प्रशिक्षण और प्रतियोगिता का अवसर मिलता रहे।
रांची विश्वविद्यालय के पास पहले से है मजबूत खेल विरासत
रांची विश्वविद्यालय की इस पहल के पीछे उसकी अपनी खेल उपलब्धियां भी महत्वपूर्ण हैं।
विश्वविद्यालय की छात्राएं सलीमा टेटे और निक्की प्रधान भारतीय हॉकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।
इसके अलावा जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने वाली पार्वती कुमारी और विनीमा धान भी विश्वविद्यालय से जुड़ी रही हैं।
यानी विश्वविद्यालय के पास यह दिखाने के लिए उदाहरण मौजूद हैं कि अगर झारखंड की प्रतिभाओं को उचित मंच मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं।
अब चुनौती यह है कि ऐसी प्रतिभाओं की संख्या कुछ खिलाड़ियों तक सीमित न रहे।
12 खेलों के आयोजन की रणनीति
रांची विश्वविद्यालय ने 2026-27 के लिए करीब 12 खेलों में अंतर-कॉलेज प्रतियोगिताओं की रणनीति तैयार की है।
खेल कैलेंडर में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, तीरंदाजी, वुशू, बैडमिंटन, खो-खो और अन्य खेल शामिल हैं। इसके साथ विभिन्न खेलों में चयन ट्रायल भी आयोजित किए जा रहे हैं।
विशेष बात यह है कि प्रतियोगिताएं केवल रांची शहर तक सीमित नहीं रखी गई हैं।
खूंटी, बेड़ो, लोहरदगा, सिल्ली और अन्य स्थानों के कॉलेजों को भी आयोजन और चयन प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
इससे विश्वविद्यालय के खेल नेटवर्क को ग्रामीण और छोटे शहरों तक विस्तार मिलने की संभावना है।
कॉलेजों में टूर्नामेंट पर जोर
बैठक में कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को अनिवार्य करने पर भी सहमति बनी।
इसका उद्देश्य छात्रों को केवल चयन ट्रायल तक सीमित रखने के बजाय नियमित प्रतियोगिता का अनुभव देना है।
क्योंकि किसी खिलाड़ी की वास्तविक क्षमता केवल एक ट्रायल से सामने नहीं आती।
लगातार प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन, दबाव झेलने की क्षमता, फिटनेस और तकनीकी कौशल भी महत्वपूर्ण होते हैं।
खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी
नई रणनीति में खेल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
बैठक में कबड्डी और खो-खो के लिए मैट/टर्फ की व्यवस्था, तीरंदाजी के लिए उपयुक्त मैदान की तलाश और वॉलीबॉल व क्रिकेट की आवश्यक सामग्री खरीदने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों और कोचों के लिए बीमा योजना लागू करने पर भी निर्णय हुआ।
खिलाड़ियों के लिए डीए के रूप में 500 रुपये और कोच/मैनेजर के लिए 700 रुपये निर्धारित करने पर सहमति बनी।
14 खेलों में चयन ट्रायल
विश्वविद्यालय के खेल कैलेंडर में 2026-27 के लिए 14 खेलों के चयन ट्रायल भी शामिल किए गए हैं।
यानी विश्वविद्यालय केवल अंतर-कॉलेज प्रतियोगिताओं पर निर्भर नहीं रहेगा।
बल्कि विभिन्न खेलों के लिए अलग से खिलाड़ियों की पहचान और चयन प्रक्रिया भी चलाएगा।
इसमें हॉकी, वॉलीबॉल, कबड्डी, ताइक्वांडो, क्रिकेट, वेटलिफ्टिंग, योग, बास्केटबॉल सहित कई खेलों के ट्रायल शामिल हैं।
2025-26 का प्रदर्शन भी उत्साह बढ़ाने वाला
रांची विश्वविद्यालय की पिछली खेल उपलब्धियां भी नई रणनीति को मजबूती देती हैं।
विश्वविद्यालय की खेल रिपोर्ट के अनुसार पुरुष फुटबॉल टीम ईस्ट जोन चैंपियन बनी और खेलो इंडिया के लिए क्वालीफाई किया।
महिला फुटबॉल टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि महिला हॉकी टीम ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन किया।
तीरंदाजी टीम ने भी खेलो इंडिया के लिए क्वालीफाई किया।
वुशू में विश्वविद्यालय की टीम उपविजेता रही और खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए।
महिला क्रिकेट टीम भी ऑल इंडिया स्तर की प्रतियोगिता तक पहुंची।
असली परीक्षा अब जमीन पर होगी
रांची विश्वविद्यालय की नई खेल रणनीति निश्चित रूप से उम्मीद जगाती है।
लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गांव-कस्बों में प्रतिभा खोज कितनी नियमित और पारदर्शी होती है।
चयनित खिलाड़ियों को कितना गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिलता है और उनके लिए आगे की प्रतियोगिताओं तक पहुंच कितनी आसान बनाई जाती है।
अगर विश्वविद्यालय अपने संसाधनों और विशेषज्ञों को ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफल रहता है।
तो यह पहल झारखंड की खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ा अवसर बन सकती है।
क्योंकि झारखंड में सवाल प्रतिभाओं की कमी का नहीं,
बल्कि प्रतिभा को सही समय पर पहचानने और सही मंच तक पहुंचाने का है।
