गैस संकट: देशभर में होटल-रेस्टोरेंट संकट में, सरकारी सख्ती के बाद भी राहत नहीं

Gas Crisis in India: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और हॉर्मुज जलमार्ग से गैस की सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत में गैस की कमी महसूस होने लगी है। हालात को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (ECA) लागू कर दिया है। मतलब साफ है कि अब गैस की सप्लाई और स्टॉक पर सरकार की कड़ी नजर रहेगी, ताकि कोई जमाखोरी न कर सके।

अब सरकार ने गैस की सप्लाई को चार कैटेगरी में बांट दिया है, ताकि जरूरी जगहों पर पहले गैस पहुंचे।

  1. सबसे पहले घर और गाड़ियां
    घर में इस्तेमाल होने वाली PNG और गाड़ियों की CNG को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। यानी आम लोगों का चूल्हा और गाड़ी फिलहाल चलाते रहने की कोशिश है।
  2. खाद बनाने वाले कारखाने
    उर्वरक कंपनियों को करीब 70 फीसदी गैस दी जाएगी, क्योंकि खेती के लिए खाद बहुत जरूरी है।
  3. बड़े उद्योग
    बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत का लगभग 80 फीसदी गैस देने की कोशिश की जा रही है ताकि फैक्ट्री पूरी तरह बंद न हो जाए।
  4. छोटे उद्योग और होटल-रेस्टोरेंट
    होटल, ढाबे और छोटे कारखानों को भी करीब 80 फीसदी गैस देने का प्लान है, लेकिन कई जगह असल में गैस कम ही मिल रही है। इसलिए कई रेस्टोरेंट वालों की हालत ऐसी है जैसे गैस नहीं, परीक्षा का रिजल्ट आने वाला हो।

अलग-अलग राज्यों में हाल

उत्तर प्रदेश
लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 4-5 दिन की देरी हो रही है।

महाराष्ट्र
मुंबई, पुणे और नागपुर में गैस की भारी कमी है। मुंबई में करीब 20% होटल बंद हो चुके हैं।

होटल वालों की हालत- “किचन है लेकिन गैस नहीं”

राजस्थान
यहां होटल और मैरिज गार्डन वाले परेशान हैं क्योंकि गैस का कोई आसान विकल्प नहीं है।

झारखंड
लोग गैस भरवाने के लिए लाइन में लग रहे हैं।

कई लोगों को 15 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिला

सरकार ने क्या नियम बनाये हैं?

  • अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरी बुकिंग 25 दिन बाद ही होगी
  • डिलीवरी के समय OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा
  • रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं
  • सप्लाई पर नजर रखने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है

आखिर गैस संकट क्यों आया?

  1. हॉर्मुज जलमार्ग में तनाव
    दुनिया का लगभग 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण जहाज कम जा रहे हैं।
  2. LNG उत्पादन में कमी
    भारत को गैस देने वाले देशों खासकर कतर से सप्लाई कम हो गई है।

आगे क्या होगा?

यदि मध्य-पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ और हॉर्मुज जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

फिलहाल सरकार वैकल्पिक स्रोतों से तेल और गैस आयात करने की संभावनाओं पर काम कर रही है।

अमेरिका समेत कई देशों से अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो मंगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देश अपने आपातकालीन ऊर्जा भंडार का उपयोग करने पर चर्चा कर रहे हैं।

सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

प्राथमिकता यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता बनी रहे और आवश्यक सेवाओं पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।