रिटायरमेंट के दिन ही मिला वर्षों की सेवा का सम्मान, रांची में 8 शिक्षकों को सौंपे गए सभी सेवानिवृत्ति लाभ

Retirement Farewell: अमूमन रिटायरमेंट के बाद सालों की नौकरी का लाभ उठाने के लिए वर्षों तक उन्हीं सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जहां कर्मचारी ने अपनी जिंदगी के 30-35 साल सेवा में गुजार दिए।

पेंशन से लेकर ग्रेच्युटी और दूसरे सेवानिवृत्ति लाभ हासिल करने के लिए कागजी प्रक्रिया अक्सर रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारी का पीछा नहीं छोड़ती।

लेकिन रांची में जिला प्रशासन की एक पहल ने इस पुरानी तस्वीर को बदलने की कोशिश की है।

यहां 8 शिक्षकों को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन ही उनके सभी रिटायरमेंट बेनिफिट सौंप दिए गए।

यानी जिस दिन सरकारी सेवा से विदाई हुई, उसी दिन वर्षों की सेवा का अधिकार भी उनके हाथों में था।

पेंशन दरबार में मिली सम्मानजनक विदाई

रांची में पेंशन दरबार-सह-सेवानिवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह की अध्यक्षता उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने की।

इस समारोह में 8 शिक्षकों को सम्मानित किया गया और उन्हें सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी देय सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए गए।

जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य स्पष्ट था- जिस कर्मचारी ने वर्षों तक सरकारी व्यवस्था को अपनी सेवाएं दीं, उसे अपने हक के लिए उसी व्यवस्था के चक्कर न लगाने पड़े।

इन शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के दिन मिले लाभ

समारोह में जिन 8 शिक्षकों को सम्मानित किया गया, उनमें

पूनम एक्का, सहायक शिक्षक, राजकीय मध्य विद्यालय ओपा (बालिका), चान्हों।

सुरेखा कुमारी, सहायक शिक्षक, राजकीय मध्य विद्यालय गाड़ी, रांची-1।

युगेश्वर विश्वकर्मा, सहायक शिक्षक, आरा देवरखण्ड, बुढ़मू।

शिवसागर प्रसाद, सहायक शिक्षक, राजकीय उच्च मध्य विद्यालय मुन्ना, बुढ़मू।

शिवनन्दन कुमार, सहायक शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बारेडीह, बेड़ो।

सुनीता चौधरी, सहायक शिक्षक, श्रद्धानन्द सेवाश्रम मध्य विद्यालय, रातू पथ, रांची-1।

विभा तिर्की, सहायक शिक्षक, संत पौल्स मध्य विद्यालय, चर्च रोड, रांची।

सिबिलन मड़की, सहायक शिक्षक, जी.ई.एल. मध्य विद्यालय, अमलेशा, तमाड़, रांची।

इन सभी शिक्षकों को स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया और उनके लंबे सेवाकाल के लिए आभार जताया गया।

शिक्षक सिर्फ कक्षा नहीं, समाज भी बनाते हैं- उपायुक्त

उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबे सेवाकाल और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

उन्होंने सभी को अच्छे स्वास्थ्य और सुखद सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती।

एक शिक्षक आने वाली पीढ़ियों को तैयार करता है और इसी के जरिए समाज के निर्माण में भी योगदान देता है।

मोबाइल की बढ़ती लत पर भी जताई चिंता

समारोह के दौरान उपायुक्त ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत को लेकर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए समाज के सभी वर्गों से जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

रिटायरमेंट के बाद भी समाज के लिए योगदान की अपील

उपायुक्त ने सेवानिवृत्त शिक्षकों से एक और महत्वपूर्ण अपील की।

उन्होंने कहा कि अपने आसपास मौजूद गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाए।

उनका संदेश साफ था कि सरकारी सेवा खत्म हो सकती है, लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।

यदि कोई शिक्षक अपने आसपास के एक भी वंचित बच्चे को पढ़ने का अवसर देता है, तो वह समाज में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

प्रशासन की पहल ने दिया बड़ा संदेश

रांची जिला प्रशासन की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ किसी कर्मचारी पर प्रशासन की कृपा नहीं, बल्कि उसकी वर्षों की सेवा के बदले उसका अधिकार होते हैं।

ऐसे में रिटायरमेंट के दिन ही सभी लाभ उपलब्ध कराना न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि उस कर्मचारी को यह एहसास भी कराता है कि जिस व्यवस्था की सेवा उसने पूरी जिंदगी की, वही व्यवस्था विदाई के वक्त उसके साथ खड़ी है।

समारोह में जिला शिक्षा पदाधिकारी वसीम अहमद और जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

रांची जिला प्रशासन की यह पहल सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और समयबद्ध सेवा की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के तौर पर देखी जा रही है।