The story of Salima Tete: इसी वर्ष अगस्त में FIH महिला हॉकी विश्व कप होना है। नीदरलैंड और बेल्जियम में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा।
इसके लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है और टीम की कमान सलीमा टेटे को दी गयी है।
झारखंड के सिमडेगा जिले के एक गरीब परिवार से आने वाली सलीमा टेटे ने अपनी शानदार रफ्तार और डिफेंस के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।
150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं सलीमा टेटे का जीवन इतना आसान नहीं रहा है।
बेहद गरीब परिवार से आने वाली सलीमा टेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने में एक संघर्ष, त्याग और समर्पण की कहानी है।
शुरूआती जीवन और संघर्ष
सिमडेगा के बड़कीछापर गांव के एक गरीब किसान परिवार में सलीमा टेटे का जन्म 27 दिसंबर 2001 को हुआ।
सलीमा के पिता सुलक्षण टेटे पेशे से एक किसान थे। सुलक्षण टेटे समय मिलने पर स्थानीय स्तर पर हॉकी भी खेला करते थे।
बचपन में सलीमा अपने पिता के साथ साइकिल पर बैठकर स्थानीय ह़ॉकी खस्सी प्रतियोगिता देखने जाया करती थीं।
अपने पिता को खेलते देख सलीमा के मन में हॉकी खेलने की इच्छा जगी।
परिवार की माली हालत ये थी कि घर में खेलने के लिए अपना हॉकी स्टिक तक नहीं था।
बांस की खपच्चियों से बनी स्टिक से उन्होंने अभ्यास शुरू किया।

सलीमा के इस समर्पण को देखकर उनकी मां सुभानी टेटे और बड़ी बहन अनिमा टेटे ने दूसरों के घरों में बर्तन मांजे और खाना बनाया।
इसके बाद सलीमा के खेलने के लिए हॉकी स्टिक और बॉल जुटाया जा सका।
सलीमा का प्रतिभा को मिली पहचान
सलीमा ने स्थानीय स्तर पर हॉकी खेलना शुरू किया।
इसके बाद वर्ष 2013 में सलीमा की प्रतिभा को पहचानते हुए उनको पहला अवसर मिला।
झारखंड सरकार द्वारा सिमडेगा में संचालित आवासीय हॉकी सेंटर में सलीमा का चयन किया गया।
हालांकि शुरूआती दौर में आधिकारिक रजिस्टर में उनका नाम नहीं दर्ज किया गया था।
इस वजह से सरकारी नियमों के तहत उन्हें मुफ्त में खाना और किट नहीं मिला।
लेकिन सलीमा टेटे ने हार नहीं मानी और लड़की चुनकर खुद खाना बनाकर खाती थीं और फिर मैदान में अभ्यास करती थीं।
अभ्यास सत्र के दौरान उनका खेल देखकर आखिरकार उन्हें हॉकी सेंटर में जगह मिल गयी।
सलीमा टेटे के हॉकी के सफर की शुरूआत
हॉकी सेंटर में अभ्यास के दौरान सलीमा टेटे की रफ्तार देख कोच और प्रशिक्षक भी हैरान थे।
सभी खिलाड़ियों से मैदान में हॉकी स्टिक और गेंद के साथ तेज दौड़ सलीमा ने सभी का ध्यान खींचा।
उनके इसी प्रतिभा को देखते हुए वर्ष 2014 में झारखंड की सब जूनियर हॉकी टीम में चुन लिया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की टीम के लिए कमाल करने के बाद राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं की नज़र उनपर पड़ी।
सलीमा टेटे का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू
आखिरकार 2016 में वो वह समय आ गया जब सलीमा टेटे का चयन राष्ट्रीय टीम में हुआ।
भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम के साथ वे पहले विदेशी दौरे पर गयीं।
इसके बाद सलीमा को जूनियर टीम का उपकप्तान बनाया गया।
फिर 2016 में ही सलीमा की रफ्तार और खेल देख उनका चयन भारतीय महिला हॉकी की सीनियर टीम में हुआ।
सीनियर टीम के साथ उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया।
वर्ष 2023 में सलीमा टेटे को भारतीय महिला हॉकी सीनियर टीम का कप्तान बनाया गया।
सलीमा टेटे की उपलब्धियां
U-18 एशिया कप- उपकप्तान के रूप में भारत को कांस्य पदक दिलाया।
यूथ ओलंपिक- जूनियर टीम की कप्तान के रूप में भारत को रजत पदक दिलाया।
टोक्यो ओलंपिक- इस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम का वो हिस्सा रहीं।
हालांकि इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही लेकिन सलीमा टेटे ने अपनी रफ्तार और खेल की वजह से पूरी दुनिया में एक अलग छाप छोड़ी।
कॉमनवेल्थ गेम्सः बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को कांस्य पदक दिलाया।
एशियाई चैंपियंस ट्रॉफीः रांची में आयोजित हुए इस प्रतियोगिता में सलीमा टेटे ने अपनी अगुवाई भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

एशियाई खेलः हांग्जो में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारत को सलीमा टेटे ने कांस्य पदक दिलवाने में अहम भूमिका निभायी।
FIH नेशंस कपः न्यूज़ींलैंड में 2026 में संपन्न हुए नेशंस कप में भारतीय टीम सलीमा टेटे की कप्तानी में अजेय रही और ट्रॉफी जीतने का हकदार बनी।
सलीमा टेटे को मिले सम्मान
2023 में इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर इन एशिया का अवार्ड मिला।
खेल में बेहतरीन योगदान के लिए 2024 में सलीमा टेटे को देश का प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
यह पुरस्कार पाने वाली सलीमा टेटे झारखंड की पहली महिला और दूसरी हॉकी खिलाड़ी हैं।
सलीमा का जीवन संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ने वाली हर युवा खिलाड़ी, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
