Budget Session: हम अक्सर सुनते या देखते हैं कि सरकार ने मानसून सत्र (Monsoon Session) बुलाया, कभी शीतकालीन सत्र (Winter Session), कभी बजट सत्र (Budget Session)। मन में यह सवाल ज़रूर आता है कि ये तीनों सत्र होता क्या है और उनमें क्या-क्या अलग अलग बातें होती हैं।
तो ये जानकारी हम आपको आज देने जा रहे हैं। आमतौर पर एक वर्ष में तीन सत्रों का आयोजन किया जाता है। बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र।
बजट सत्र
बजट सत्र को सभी सत्रों में बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर बजट सत्र का आयोजन फरवरी से मई महीने के बीच होता है। इस सत्र को दो अवधियों में बांटा गया है, जिनके बीच करीब एक महीने का अंतर होता है।
हर वर्ष इस सत्र की शुरूआत देश के महामहिम राष्ट्रपति के दोनों सदन को किये गये संबोधन से शुरू होती है। इस सत्र के दौरान वित्त मंत्री देश का बजट पेश करते हैं। जिसमें सरकार यह तय करती है कि आने वाले वित्तिय वर्ष में पैसे किस तरीके से खर्च किये जायेंगे।
आयकर स्लैब (Income Tax Slab) और रोजमर्रा के सामान महंगे-सस्ते किस कैटेगरी में होंगे। ट्रेन टिकट से लेकर विमानों का किराया और किचन का बजट भी इसी दौरान तय किया जाता है।
मानसून सत्र
मानसून सत्र अमूमन बरसात के मौसम यानि जुलाई के महीने से सितंबर के बीच आयोजित किया जाता है। इसमें जनहित के मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
शीतकालीन सत्र
हर साल के नवंबर और दिसंबर महीने में संसद का शीतकालीन सत्र आयोजित किया जाता है। सदन में आयोजित होने वाले सभी सत्रों में यह सबसे छोटा सत्र होता है। वैसे सभी मामले जिनपर पहले के सत्रों में चर्चा नहीं हो पायी उनपर कार्य किया जाता है।
साथ ही इसी सत्र के दौरान विधायी कार्यों की कमियों को भी पूरा किया जाता है।
संसद का संयुक्त सत्र
तीन सत्रों के अलावा एक ऐसा सत्र है जिसे राष्ट्रपति बुलाते हैं। दरअसल लोकसभा और राज्यसभा के बीच अगर किसी तरह का कोई गतिरोध होता है तो उसे दूर करने के लिए इस सत्र का आयोजन किया जाता है।
इस सत्र की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष के हाथों में होती है। अब आप सोच रहे होंगे कि किस तरह के गतिरोध की बात होती है संसद में। अगर किसी एक सदन में कोई विधेयक पारित हो गया लेकिन वो दूसरे सदन में पारित नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में संयुक्त सत्र का आह्वान किया जाता है।
