रांची में शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए 20 शिक्षाविद, दिवंगत मंत्री सुदिव्य सोनू को दी गयी श्रद्धांजलि

Rotary Club of Ranchi South: शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।

इसी विचार को केंद्र में रखते हुए रोटरी क्लब ऑफ रांची साउथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर रांची में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया।

कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 20 शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब ऑफ रांची साउथ के अध्यक्ष रोटेरियन राजा बागची ने की।

क्लब के सचिव रोटेरियन शिवेंद्र मोहन शर्मा और कोषाध्यक्ष रोटेरियन योगेंद्र साहू हैं।

मंच संचालन रोटेरियन निर्मल तिग्गा, रोटेरियन प्रतीक कुमार एवं साची कुमारी ने किया।

क्लब की मौजूदा टीम की सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रियता पहले भी सामने आती रही है।

दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि

समारोह की शुरुआत झारखंड के दिवंगत मंत्री स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि अर्पित कर हुई।

उनके आकस्मिक निधन को झारखंड और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए रोटेरियन रथिन भद्रा ने दो मिनट का मौन रखने का प्रस्ताव रखा।

इस दौरान उनके सरल, विनम्र और मिलनसार व्यक्तित्व को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सोनू का असामयिक निधन राज्य के लिए बड़ी क्षति है।

डॉ. ए.टी. मिश्रा ने सुनाई संघर्ष से सफलता तक की कहानी

समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. ए.टी. मिश्रा, आईएफएस एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखंड ने विद्यार्थियों के सांस्कृतिक विकास, नैतिक मूल्यों और समग्र शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की प्रेरणादायक कहानी साझा की।

उन्होंने बताया कि वे कोरापुट के एक गांव की पृष्ठभूमि से आते हैं और विद्यार्थी जीवन के शुरुआती दौर में पढ़ाई में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं था।

लेकिन शिक्षकों के निरंतर प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और विश्वास ने उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा किया।

शिक्षकों के प्रयास से वे अपनी कक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने में सफल हुए और इसके बाद उन्होंने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि हर बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है और एक अच्छे शिक्षक की जिम्मेदारी उस प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देना है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा में तकनीकी ज्ञान और प्रतिस्पर्धी क्षमता जरूरी है, लेकिन विद्यार्थियों का अपनी संस्कृति, परंपरा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल सफल पेशेवर बनाने के बजाय जिम्मेदार, संवेदनशील, संस्कारी और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

20 शिक्षकों एवं शिक्षाविदों का सम्मान

समारोह में कृष्ण प्रसन्न डे, गीता कुमारी, स्नेह प्रतीक मेहता, संजय बोस, डॉ. प्रसंजित मुखर्जी, सोनी अन्ना सरैय्या, रितिका रूपम, रोटेरियन डॉ. सुभाष कुमार, रोटेरियन डॉ. सुपल एक्का, रोटेरियन डॉ. शैलेंद्र मिश्रा, रोटेरियन प्रियंका नम्रता बिस्वास, रोटेरियन निर्मल चंद्र तिग्गा, फादर डॉ. प्रदीप केरकेट्टा, डॉ. निरंजन साहू, डॉ. भास्कर भवानी, डॉ. पिनाकी घोष, डॉ. राजश्री वर्मा, डॉ. अमर एरॉन तिग्गा, रूमझूम बागची और रोटेरियन प्रतीक कुमार को सम्मानित किया गया।