हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का दिल टूटा, बेल्जियम ने शूटआउट में हराया, आठवें स्थान पर खत्म हुआ सफर

Hockey World Cup: वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का सफर जीत के साथ खत्म नहीं हो सका। बेल्जियम के खिलाफ 7वें-8वें स्थान के मुकाबले में भारत ने जबरदस्त संघर्ष किया, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में मेजबान टीम के सामने 3-4 से हार गया।

निर्धारित समय तक दोनों टीमें 3-3 की बराबरी पर थीं।

आखिरी पल तक लड़ती रही टीम इंडिया

बेल्जियम के वावरे में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए।

भारत की ओर से अभिषेक ने शुरुआती बढ़त दिलाई।

इसके बाद बेल्जियम ने वापसी करते हुए मैच को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की।

मुकाबला जैसे-जैसे आगे बढ़ा, दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। बेल्जियम ने दबाव बनाया तो भारत ने भी कई मौकों पर शानदार जवाब दिया।

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर से दो महत्वपूर्ण गोल करके टीम की उम्मीदें जिंदा रखीं।

निर्धारित समय खत्म होने तक स्कोर 3-3 रहा, यानी मैच का फैसला सीधे पेनल्टी शूटआउट से होना था।

शूटआउट में बेल्जियम ने मारी बाजी

शूटआउट में मुकाबला और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।

दोनों टीमों के खिलाड़ियों पर भारी दबाव था।

भारतीय खिलाड़ियों ने गोल करने की कोशिश की, लेकिन बेल्जियम के अनुभवी गोलकीपर विंसेंट वानाश ने महत्वपूर्ण बचाव किए।

आखिरकार बेल्जियम ने शूटआउट 4-3 से अपने नाम कर लिया और भारत को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

हरमनप्रीत के 2 गोल भी नहीं दिला सके जीत

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह इस मुकाबले में टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में रहे।

उनके 2 गोलों ने भारत को मैच में बनाए रखा।

लेकिन आखिरी फैसला शूटआउट में हुआ, जहां भारतीय टीम जीत हासिल नहीं कर सकी।

इस हार के साथ भारत का FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 अभियान आठवें स्थान पर समाप्त हुआ।

खिताब का इंतजार फिर बढ़ा

भारतीय हॉकी टीम के लिए यह विश्व कप उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा।

टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने के बाद वर्गीकरण मुकाबलों में उतरी थी। अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार के बाद भारत खिताब की दौड़ से बाहर हो गया था।

अब भारतीय हॉकी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ निर्णायक मुकाबलों में प्रदर्शन को कैसे बेहतर किया जाए।

टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण मौकों को भुनाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एक तरफ आठवां स्थान निराश करने वाला है, तो दूसरी तरफ बेल्जियम के खिलाफ आखिरी क्षण तक लड़ने वाली टीम इंडिया ने यह जरूर दिखाया कि उसमें वापसी की क्षमता मौजूद है।