Chess Olympiad 2026: समरकंद में चल रहे 46वें FIDE चेस ओलंपियाड 2026 में भारतीय शतरंज टीमों का प्रदर्शन अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है।
25 सितंबर को खेले गए नौवें राउंड के बाद भारत की पुरुष और महिला, दोनों टीमें शीर्ष मुकाबले में बनी हुई हैं।
प्रतियोगिता में कुल 11 राउंड खेले जाने हैं और अब सिर्फ दो राउंड बाकी हैं।
पुरुष टीम ने जर्मनी को दी मात
भारतीय पुरुष टीम ने नौवें राउंड में जर्मनी को 2.5-1.5 से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।
मुकाबले में आर. प्रज्ञानानंदा, अर्जुन एरिगैसी और निहाल सरीन ने अपने-अपने मुकाबले ड्रॉ खेले, जबकि विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने अलेक्जेंडर डोनचेंको को हराकर भारत को निर्णायक अंक दिलाया।
गुकेश इस ओलंपियाड में लगातार प्रभावी प्रदर्शन कर रहे हैं।
राउंड 9 तक उनकी 7 बाजियों में 6 जीत और एक ड्रॉ रहा।
वहीं प्रज्ञानानंदा भी शीर्ष बोर्ड पर महत्वपूर्ण अंक जुटा रहे हैं।
इस जीत के बाद भारत खिताब की दौड़ में मजबूती से बना हुआ है।
इससे पहले टीम को मेजबान उज्बेकिस्तान के हाथों 1.5-2.5 की हार का सामना करना पड़ा था।
लेकिन उसके बाद भारतीय टीम ने वापसी करते हुए इंग्लैंड और अब जर्मनी जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ जीत दर्ज की।
महिला टीम की भी शानदार वापसी
भारतीय महिला टीम ने नौवें राउंड में मेजबान उज्बेकिस्तान को 3-1 से हराकर पदक की स्थिति मजबूत की।
इस मुकाबले में दिव्या देशमुख और वंतिका अग्रवाल ने जीत दर्ज की, जबकि कोनेरू हम्पी और साविता श्री ने अपने मुकाबले ड्रॉ किए।
महिला टीम के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि राउंड आठ में भारत को अजरबैजान के खिलाफ 2-2 की बराबरी पर संतोष करना पड़ा था।
उससे पहले पोलैंड के खिलाफ मिली हार ने टीम की लगातार जीत की लय तोड़ी थी।
इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव में शानदार वापसी की है।
अब चीन से होगा बड़ा मुकाबला
महिला वर्ग में चीन इस समय बढ़त बनाए हुए है और भारत सहित कई टीमें उसके पीछे हैं।
नौवें राउंड के बाद भारत ने उज्बेकिस्तान को हराकर खुद को पदक की स्थिति में पहुंचाया है।
अब अगले राउंड में भारत और चीन की भिड़ंत बेहद महत्वपूर्ण होगी।
पुरुष वर्ग में भी मुकाबला बेहद कड़ा है।
उज्बेकिस्तान ने अमेरिका को 2.5-1.5 से हराकर बढ़त बनाए रखी।
जबकि भारत ने जर्मनी को हराकर अपनी चुनौती कायम रखी है।
भारत के लिए अंतिम दो राउंड क्यों अहम?
भारत दोनों वर्गों में 2024 बुडापेस्ट ओलंपियाड के चैंपियन के रूप में उतरा है।
इसलिए समरकंद में चुनौती केवल पदक जीतने की नहीं, बल्कि अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की भी है।
अब प्रतियोगिता अंतिम चरण में है।
एक जीत और एक ड्रॉ भी अंक तालिका में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है, क्योंकि शीर्ष टीमों के बीच अंतर बेहद कम है।
पुरुष टीम के लिए गुकेश, प्रज्ञानानंदा, अर्जुन और निहाल जैसे खिलाड़ियों का प्रदर्शन निर्णायक रहेगा।
जबकि महिला टीम में दिव्या, वंतिका, साविता और अनुभवी कोनेरू हम्पी पर निगाहें रहेंगी।
शतरंज की इस जंग में अब एक गलती सिर्फ आधा अंक नहीं गंवाएगी बल्कि वह पदक की पूरी तस्वीर बदल सकती है।
