जेन जी आंदोलन के बाद बनी नेपाल की नई सरकार से भारत के रिश्ते कितने सकारात्मक?

India-Nepal Relation: नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद पहली बार चुनाव के बाद सरकार बन रही है। लोकतांत्रिक तरीके से हुए चुनाव में एक युवा प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। एक ऐसा युवा जिसने अपने बयानों से भारत के खिलाफ काफी ज़हर उगला है।

ऐसे में नेपाल की नयी सरकार के गठन के बाद भारत के अपने पड़ोसी देश से संबंध कैसे रहेंगे, यह एक गंभीर सवाल है। साथ ही क्या यह जेन जी आंदोलन के बाद चुनाव का परिणाम भारत समेत कई प़ड़ोसी देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

जेन जी आंदोलन ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया। एक छोटे से लेकिन प्रबुद्ध देश में लगभग 3 लाख करोड़ रूपये का नुकसान हुआ और पर्यटन के क्षेत्र में भी गहरा प्रभाव पड़ा।

इस आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्तियों का बड़ा नुकसान हुआ जिससे आम जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

यह आंदोलन युवाओं ने किया था जिनका विरोध भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और तानाशाही के खिलाफ था। डिजिटल रूप से संगठित इस आंदोलन की शुरूआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई लेकिन बाद में यह आक्रामक और हिंसात्मक हो गया।

जेन जी है क्या?

वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्म लिये लोगों को जेनरेशन जूमर्स कहते हैं जिसे संक्षिप्त में जेन जी कहा जाने लगा।

ये पीढ़ी उस दौर की है जब इंटरनेट, मोबाइल और डिजिटल मीडिया का प्रभाव काफी बढ़ा।

नेपाल सरकार के सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाते ही युवाओं का विरोध शुरू हो गया।

यह आंदोलन कहीं से भी संगठित आंदोलन नहीं था। धीरे-धीरे लोग सड़कों पर आते गये और यह आंदोलन बड़ा रूप लेता चला गया।

कोई भी आंदोलन बुरा नहीं होता है अगर शांतिपूर्ण और सकारात्मक तरीके से की जाये। लेकिन हिंसात्मक और आक्रामक आंदोलन न सिर्फ लोगों के लिए खतरा होता है बल्कि देश के लिए खतरा होता है।

आंदोलन कर रहे युवा कहते हैं कि उनका जेनरेशन सभी से अलग है। वे चाहते हैं कि देश में कुछ करें, लेकिन उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि राजनीतिक भष्टाचार की वजह से उनके अवसर छीने जा रहे हैं।

दरअसल ये अस्थिरता और भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह है एक दल की बहुमत वाली सरकार न बनना। बहुमत नहीं मिलने की वजह से कई दल मिलकर सरकार बना लेते हैं।

सरकार बनने के बाद सभी दलों के अपने-अपने चुनावी एजेंडे बदल जाते हैं और इससे ही लोगों में गुस्सा पनपता है।

बालेंद्र शाह का परिचय

एक सरकारी आयुर्वेद चिकित्सक के घर पैदा हुए बालेंद्र ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। भारत के कर्नाटक में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। हालांकि इंजीनियरिंग छोड़ म्यूज़िक को अपने करियर के रूप में चुना और एक रैपर के तौर पर पहचान बनाई।

वर्ष 2022 में राजनीति में पहला कदम रखा और काठमांडू मेयर का चुनाव एक निर्दलीय प्रत्याशी रहते जीता।

जेन जी को अपना हथियार बनाते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम रखा और डिजिटल आंदोलन के लिए युवाओं को तैयार किया।

बालेंद्र शाह का भारत पर रूख

नेपाल के अगले पीएम बनने वाले बालेंद्र शाह का अतीत भारत के लिए अच्छा नहीं रहा है। उन्होंने कई मुद्दों को लेकर भारत के खिलाफ ज़हर उगला है।

काठमांडू में बॉलीवुड फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की बात करने के बाद दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को लेकर विवाद हुए थे। जब बालेंद्र काठमांडू के मेयर थे तो उन्होंने अपने कार्यालय में ग्रेटर नेपाल का नक्शा लगाया था। इस नक्शे में भारत के कई हिस्सों को नेपाल का बताया गया था।

हालांकि बालेंद्र शाह ने कभी भारत के साथ लड़ाई या हिंसा करने जैसा बयान नहीं दिया है, जबकि दूसरे अन्य कई राजनेताओं ने युद्ध जैसी बातें कही भी है।

भारत-नेपाल के रिश्ते काफी गहरे

भारत और नेपाल के संबंध बेहद गहरे रहे हैं। चाहे वह ऐतिहासिक हो या सांस्कृतिक, आर्थिक या भौगोलिक। 1950 की मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इसी संधि के प्रावधानों के तहत नेपाली नागरिकों ने भारतीय नागरिकों के समान इस देश में सुविधाओं और अवसरों का लाभ उठाया है।

आंकड़े बताते हैं कि भारत में 60 लाख से ज़्यादा नेपाली नागरिक रहते और काम करते हैं।

हालांकि कई मुद्दों पर भारत-नेपाल में विवाद भी रहा है। कालापानी-लिपुलेख जैसे सीमा विवाद के साथ ही चीन के नेपाल में बढ़ते प्रभाव के कारण भी तनाव देखने को मिलता रहा है।

बावजूद इसके भारत सरकार नेपाल को हर संभव मदद के लिए आगे खड़ा रहा है। नेपाल में वर्ष 2015 में आये भूकंप की त्रासदी के बाद भारत ने राहत सामग्री, विशेष विमान और एनडीआरएफ जवानों को सहायता के लिए भेजा था।

भारत के साथ कैसे रहेंगे नेपाल के संबंध?

पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली चीन के बेहद करीब थे। बीते कुछ दिनों से भारत के साथ सीमा विवाद और अन्य कई मुद्दों पर कड़वाहट चल रही थी। इसीलिए केपी ओली का जाना चीन के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

भारत चाहेगा कि नई सरकार के साथ लोकतांत्रिक और संविधान के दायरे में रहकर दोनों के देशों के बीच संबंध स्थापित रहे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल की जनता और नई सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है।

भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि नेपाल में दशकों बाद एक स्थिर सरकार बनने जा रही है।

हिन्दुस्तान को उम्मीद है कि स्थिर सरकार बनने के बाद बीते कुछ वर्षों में कनेक्टिविटी, उर्जा क्षेत्र और द्विपक्षीय कारोबार से जुड़ी लंबित मामलों पर तेजी से कदम उठाये जा सकेंगे।