First Petrol Pump in India: देश में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमत से लोग परेशान हैं।
हर रोज इसी बात की चर्चा होती है कि अगर ईंधन नहीं होता तो जीवन कैसा होगा।
लेकिन क्या आपको पता है कि हिन्दुस्तान का पहला पेट्रोल पंप कब खुला था।
आज भारत में कुल पेट्रोल पंपों की संख्या 1 लाख से भी अधिक हो गई है।
भारत के पहले पेट्रोल पंप का इतिहास
भारत का पहला पेट्रोल पंप वर्ष 1928 में मुंबई में खोला गया था।
तब मुंबई को बॉम्बे कहा जाता था। यह पेट्रोल पंप बर्मा शेल द्वारा शुरू किया गया था, जिसे बाद में भारत पेट्रोलियम के नाम से जाना गया।
ह्यूजेस रोड (अब एनी बेसेंट रोड, वर्ली) पर स्थित इस स्टेशन को “बर्मा शेल स्टेशन” कहा जाता था।
उस पेट्रोल पंप में केवल दो हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर थे।
इसकी स्टोरेज कैपेसिटी लगभग 200-300 गैलन (900-1200 लीटर) थी।
बर्मा शेल एक ब्रिटिश तेल कंपनी थी, जिसने 1928 से 1976 तक भारत में काम किया और पूरे देश में मिट्टी के तेल (किरासन तेल), पेट्रोल और लुब्रिकेंट्स के डिस्ट्रिब्यूशन की शुरुआत की।
यह बर्मा ऑयल कंपनी और शेल पेट्रोलियम कंपनी के बीच एक जॉइंट वेंचर था।
भारत सरकार ने 1976 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया, जिससे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का गठन हुआ।
आज यही कंपनी भारत में करीब 25 हज़ार पेट्रोल पंप संचालित करती है।
उस समय भारत में कोई तेल रिफाइनरी नहीं था, इसलिए पेट्रोल को ही पानी के जहाजों के जरिए आयात किया जाता था।
तब पेट्रोल बर्मा (अब म्यांमार), ईरान और पश्चिम एशिया से आता था और फिर इसे ट्रकों या बैलगाड़ियों के जरिए 40 गैलन वाले ड्रमों में भरकर स्टेशन तक पहुंचाया जाता।
गाड़ियों में पेट्रोल भरने के लिए हैंड-पंपों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे यह पूरा प्रोसेस पूरी तरह से हाथों से किया जाता था।
सबसे पहले देश में पेट्रोल की कीमत क्या थी?
पहले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की कीमत 1 आना (6 पैसे) से 2 आना (12 पैसे) प्रति लीटर के बीच थी।
6 पैसे के रेट पर देखें तो 1 रुपये में 16 लीटर से अधिक पेट्रोल मिल जाता था।
मगर उस समय एक आम आदमी की औसत दैनिक आय 1 रुपये से भी कम थी।
हालांकि यह रेट भी उस समय के लिहाज से बहुत अधिक था।
उस समय पेट्रोल पंप खोलना इतना आसान नहीं था।
गाड़ियों की लिमिटेड संख्या, फ्यूल की अनियमित सप्लाई और रिफाइनरियों की कमी के कारण कंपनी के सामने कई अनिश्चितता थीं।
वहीं बारिश में ईंधन के ड्रमों को अक्सर जंग लग जाता था, जिससे उनमें रिसाव होने लगता था।
शुरुआत में इस बिजनेस के मुनाफे को लेकर काफी दुविधा रही, मगर बाद में यह बेहद सफल साबित हुआ।
पेट्रोल के शुरुआती ग्राहकों में अमीर पारसी और गुजराती व्यापारी परिवार थे।
साथ ही ब्रिटिश अधिकारियों के अलावा सरकारी अधिकारी, मुंबई आने वाले राजा और टैक्सी ड्राइवर यहां के रेगुलर कस्टमर बन गए।
आज पेट्रोलियम पदार्थ लाइफ लाइन बन गया है।
इसके बिना हम विकास की कल्पना नहीं कर सकते हैं।
