Chhath Pooja: छठ पर्व एक ऐसा त्यौहार है जो उत्तर भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। खासतौर पर उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड में इस पर्व की खासी धूम रहती है। हालांकि अब यह पर्व भारत के सभी राज्यों में मनाया जाने लगा है। साथ ही विदेशों में छठ पूजा की धूम देखने को मिलने लगी है।
साल में दो बार छठ पूजा (Chhath Pooja) मनाया जाता है। एक छठ पूजा चैत्र मास में होती है और दूसरी छठ पूजा कार्तिक मास में।
कार्तिक में आने वाला छठ दीपावली और भाई दूज के त्यौहार के बाद आता है। जबकि चैत्र मास में छठ पूजा नवरात्रि के दौरान ही मनायी जाती है। इस छठ को चैती छठ के नाम से भी जाना जाता है।
चैती और कार्तिक छठ पूजा में समानता
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से व्रत की शुरूआत होती है। शुक्ल पक्ष की सप्तमी को पूजा की समाप्ति होती है। दोनों ही छठ पूजा में 36 घंटे व्रत रखने का विधान है। छठ पूजा संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु के लिए की जाती है।

चैती और कार्तिक छठ पूजा में अंतर
चैती छठ पूजा के दौरान माता सीता की पूजा जबकि कार्तिक छठ पूजा में माता पार्वती की पूजा की जाती है। कार्तिक छठ में नहाय खाय का विशेष महत्व होता है, जबकि चैती छठ में नहाय खाय सिर्फ एक सामान्य पूजा होती है।
चैती छठ में सूर्य देव के साथ छठी मैया की आराधना जबकि कार्तिक छठ में सूर्य देव के साथ उषा देवी की आराधना की जाती है।

दोनों ही त्यौहारों में ठेकुआ और फल प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान साफ-सफाई का विशेष महत्व है। घरों के साथ ही मोहल्ले और नदी-तालाब जाने के रास्तों में भी विशेष साफ-सफाई करायी जाती है।
चार दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार के दौरान घरों में लहसुन-प्याज खाना भी मना होता है।
दोनों में कौन सी पूजा है कठिन
छठ पूजा के दौरान चार दिन तक कठिन साधना करनी पड़ती है। पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना पूजा, तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्ध्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्ध्य दी जाती है।

नहाय खाय के दिन कद्दू भात खाकर इस पर्व की शुरूआत होती है। खरना पूजा के दिन खीर, रोटी और अन्य प्रसाद खाने के बाद छठ व्रतियों की असली परीक्षा (निर्जला उपवास) शुरू होती है। अगले दिन शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। पूजा के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही पूजा की समाप्ति होती है।
इसके बाद छठ व्रती अपना निर्जला व्रत खत्म करते हैं। कार्तिक महीने में ठंड का मौसम रहता है और चैत्र में गर्मी की शुरूआत रहती है। इसीलिए कार्तिक छठ की तुलना में चैती छठ थोड़ा कठिन माना जाता है।
