Fitness in Indian cricket: भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चिंता बढ़ा दी है।
पिछले कुछ महीनों में टीम इंडिया के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल होकर महत्वपूर्ण सीरीज से बाहर हुए हैं।
इनमें जसप्रीत बुमराह, साईं सुदर्शन, वाशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।
लगातार सामने आ रही इन समस्याओं के बाद अब बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की फिटनेस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है।
फिटनेस मूल्यांकन पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार अब तक खिलाड़ियों के लिए फिटनेस का मूल्यांकन एक समान नहीं था।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खिलाड़ियों के कद, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर अलग-अलग फिटनेस पैरामीटर तय किए जा रहे थे।
आरोप है कि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट में अपेक्षाकृत आसान मानक दिए जाते थे ताकि वे आसानी से टेस्ट पास कर सकें।
इस खुलासे के बाद क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है।
माना जा रहा है कि इसी ढीले रवैये का असर खिलाड़ियों की फिटनेस और मैदान पर प्रदर्शन दोनों पर देखने को मिला।
चोटों का बढ़ता ग्राफ बनी चिंता का विषय
हाल के समय में भारतीय टीम के कई खिलाड़ी बार-बार चोटिल हुए हैं।
तेज गेंदबाजों से लेकर ऑलराउंडर और बल्लेबाज तक इस समस्या से अछूते नहीं रहे।
लगातार क्रिकेट खेलने, व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर और फिटनेस प्रबंधन में कमियों के कारण खिलाड़ियों की रिकवरी भी प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक क्रीज पर रहने या लगातार गेंदबाजी करने के बाद खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता में गिरावट साफ दिखाई दे रही है। इसके साथ ही मैदान पर फील्डिंग के दौरान सुस्ती और धीमी मूवमेंट भी चिंता का विषय बन गई है।
अब यो-यो टेस्ट नहीं, ब्रोंको टेस्ट होगा मुख्य मानक
बीसीसीआई ने अब फिटनेस मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है। लंबे समय से उपयोग में रहे यो-यो टेस्ट की जगह अब ब्रोंको टेस्ट को प्रमुख फिटनेस मानक बनाया गया है।
ब्रोंको टेस्ट खिलाड़ियों की गति, सहनशक्ति, रिकवरी क्षमता और मैच जैसी परिस्थितियों में उनकी शारीरिक तैयारी का अधिक सटीक आकलन करता है। माना जाता है कि यह टेस्ट क्रिकेटरों की वास्तविक मैच फिटनेस को बेहतर तरीके से परखता है।
मुख्य फीजियो को दिए गए सख्त निर्देश
सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई ने टीम इंडिया के मुख्य फीजियो कमलेश जैन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खिलाड़ी के नाम, अनुभव या रुतबे से प्रभावित हुए बिना फिटनेस का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए।
यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस संतोषजनक नहीं पाई जाती है या चोट का खतरा अधिक दिखाई देता है, तो इसकी तत्काल जानकारी टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं को देने के लिए कहा गया है।
भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा संदेश
बीसीसीआई का यह फैसला बताता है कि अब प्रदर्शन के साथ-साथ फिटनेस को भी बराबर महत्व दिया जाएगा।
आने वाले समय में टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को केवल रन या विकेट ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिटनेस भी साबित करनी होगी।
यदि नए नियमों को पूरी सख्ती से लागू किया जाता है, तो इससे चोटों की संख्या कम होने के साथ भारतीय टीम की फील्डिंग और सभी प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
