French Open semifinal: फ्रेंच ओपन में पोलिस खिलाड़ी माया च्वालिंस्का ने इतिहास रच दिया।
सेमीफाइनल मुकाबले को जीतकर च्वालिंस्का ने फाइनल में प्रवेश कर लिया।
माया च्वालिंस्का विश्व की 114वीं नंबर की खिलाड़ी हैं और क्वालीफाइंग मुकाबलों में जीत दर्ज कर फ्रेंच ओपन में खेलने का अवसर प्राप्त किया था।
इसी के साथ वो पहली क्वालीफाइंग खिलाड़ी बन गयीं जिन्होंने फ्रेंच ओपन में फाइनल तक का सफर तय किया है।
सीधे सेटों में हराकर रचा इतिहास
पोलिस टेनिस खिलाड़ी माया च्वालिंस्का ने सेमीफाइनल में रूस की डायना श्नाइडर को सीधे सेटों में 7-6, 6-4 से हराया।
मैच के दौरान पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच संघर्ष देखने को मिला।
लेकिन पहला सेट जीतने के बाद च्वालिंस्का मैदान पर ज़्यादा आक्रामक नज़र आईं।
डायना श्नाइडर की सर्विस ब्रेक कर उन्होंने मैच पर अपनी पकड़ बनायी और आखिरकार मुकाबला जीत इतिहास रच दिया।
च्वालिंस्का का इस साल फ्रेंच ओपन का सफर अब तक शानदार रहा है।
उन्होंने चीन की किनवेन झेंग, जर्मनी की एलिस मर्टेंस, ग्रीस की मारिया सकारी, फ्रांस की डायने पैरी और रूस की अन्ना कालिंस्काया को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनायी थी।
फाइनल में च्वालिंस्का का मुकाबला रूस की टेनिस सनसनी मीरा आंद्रीवा से होगा।
पहला फ्रेंच ओपन खेल रहीं आंद्रीवा फाइनल में
19 वर्षीय मीरा आंद्रीवा ने यूक्रेन की मार्टा कोस्त्युक को सेमीफाइनल में हराकर फाइनल में जगह बनायी।
आंद्रीवा ने यह मुकाबला सीधे सेटों (6-1, 6-3) में जीता।
मैच के दौरान आंद्रीवा ने कहीं भी मार्टा कोस्त्युक को हावी नहीं होने दिया।
इस जीत के साथ ही आंद्रीवा अपने करियर के पहले फ्रेंच ओपन के फाइनल में प्रवेश कर लिया।
वे फ्रेंच ओपन (रोलैंड गैरोस) के एकल फाइनल में पहुंचने वाली तीसरी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गयी हैं।
हालांकि मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच तनाव भी देखने को मिला।
मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों ने आपस में हाथ नहीं मिलाया।
लॉन टेनिस में हाथ मिलाने की परंपरा को खेल भावना के स्थायी प्रतीकों में एक माना जाता है।
यूक्रेनी खिलाड़ी कोस्त्युक इससे पहले भी रूसी खिलाड़ियों से मुकाबले के दौरान हाथ नहीं मिलाती रही हैं।
यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण वो ऐसा करती रही हैं।
