Chhatarpur Nagar Panchayat: लोकतंत्र में राजनीति को सेवा माना गया है। लेकिन आज के समय में सेवा भावना गाहे-बगाहे ही नेताओं में देखने को मिलती है।
चुनाव लड़ने और उसे जीतने तक वायदों और घोषणाओं की भरमार होती है।
साईकिल, पैदल चलना और न जाने कितने तरह के हथकंडे अपनाये जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद बड़ी-बड़ी गाड़ियों में चलना नेताओं के लिए स्टेटस सिंबल बन जाता है।
लेकिन इस दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने कार्यों से न सिर्फ एक बढ़िया संदेश दे रहे हैं, बल्कि उन नेताओं को भी सीख दे रहे हैं जो राजनीति को अपना स्टेटस सिंबल मानते हैं।
ऐसे ही एक शख्स हैं अरविंद कुमार गुप्ता।
झारखंड के मंजे हुए पत्रकार अरविंद ने पत्रकारिता के दौरान न जाने कितनी समस्याओं को अपनी आवाज़ दी।
हर दर्द और लोगों के दुख को अपना समझ उसे सरकार और प्रशासन तक पहुंचाकर समाधान कराने का सार्थक प्रयास किया।
लेकिन सिस्टम में भारी अनियमितता को देखते हुए उन्होंने खुद ही इस सिस्टम का हिस्सा बनने का ठान लिया।
झारखंड में हुए नगरपालिका चुनाव में किस्मत ने उनका साथ दिया।
छतरपुर की जनता ने अपने दुख के समय में साथ देने वाले साथी का साथ देने का ठाना और नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद पर अरविंद गुप्ता ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की।
अरविंद के रास्ते में चुनौतियां कम नहीं
अरविंद के लिए यह नई पारी न केवल एक बड़ी चुनौती है बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकास करना उनके लिए एक सपना भी रहा है।
कहते हैं कि शुरूआत छोटी-छोटी कदमों से करने पर आगे का रास्ता खुद ही बड़ा बन जाता है।
पेशे से पत्रकार रहे अरविंद की सोच भी कुछ ऐसी ही रही।
उन्होंने सबसे पहले अपने क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर न सिर्फ आवाज़ बुलंद की बल्कि खुद ऐसा मिसाल पेश किया जो लोगों को बरबस ही उनकी ओर आकर्षित करता गया।
पीएम नरेन्द्र मोदी की अपील
कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से बहुत सारी अपील की।
रूपया मजबूत करने के लिए उन्होंने कहा कि ईंधन का उपयोग कम से कम करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।
इसके अलावा भी उन्होंने सोना की खरीददारी से लेकर विदेश यात्रा से जुड़ी अपील भी की।
प्रधानमंत्री के अपील करते ही पूरे देश में इसका असर हुआ।
कई राज्यों के मुख्यमंत्री से लेकर ब्यूरोक्रेट्स और जज तक अपनी गाड़ियों का काफिला कम कर दिया।
लेकिन ये बस दिखावा साबित हुआ, तस्वीरें खिंचवाने तक ही ये सीमित रहीं।
पीएम के अपील के पहले ही अरविंद की पहल
प्रधानमंत्री की इस अपील से पहले ही अरविंद गुप्ता ने ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने की सोच को ज़मीन पर उतारने का प्रयास किया।
मोदी की अपील के करीब दो हफ्ते पहले ही नगर अध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने साइकिल से कार्यालय जाना शुरू कर दिया।
घर से कार्यालय करीब दो किलोमीटर का सफर वो साइकिल से आम लोगों के भीड़ से गुजरते हुए करते हैं।
अपने बीच अपने नगर अध्यक्ष को साइकिल चलाते देख लोगों की सोच बदली और बहुत सारे लोगों ने अपनी बाइक या कार छोड़ साइकिल की सवारी शुरू कर दी।
अरविंद गुप्ता की यह सोच और पहल बताती है कि वो बहुत दूर की सोचकर अपना हर कदम उठा रहे हैं।
बढ़ते प्रदूषण, ईंधन संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच छतरपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता की इस प्रेरणादायक पहल की चहुंओर चर्चा हो रही है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण
अरविंद गुप्ता के मुताबिक चुनाव में निर्वाचित होने के बाद ही उन्होंने संकल्प लिया था कि वे पर्यावरण संरक्षण और जनजागरण के लिए स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।
इसी संकल्प के तहत वे प्रतिदिन साइकिल से लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय कर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचते हैं।
उनकी यह पहल केवल एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक अभियान बन चुकी है।
साइकिल से कार्यालय जाते समय वे रास्ते में लोगों से मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी करते हैं।
नगरवासियों के बीच उनकी इस सादगीपूर्ण पहल को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है।
समाज को मिल रही है नई दिशा
इस बाबत नगर अध्यक्ष अरविंद गुप्ता कहते हैं कि आज पूरी दुनिया प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह प्रकृति के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाए।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि छोटी-छोटी पहल, जैसे साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री भी लगातार प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
छतरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष की यह पहल अब सिर्फ अपने इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड राज्य में चर्चा का विषय बन चुकी है।
लोग इसे केवल एक जनप्रतिनिधि का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक प्रेरणादायक संदेश मान रहे हैं।
सादगी, जनसरोकार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का यह उदाहरण समाज के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत कर रहा है।
