बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल के बाद सख्त सरकार, सभी सरकारी सामान वापस लेने का निर्देश

CO strike in Bihar: बिहार में ज़मीन से संबंधित कामकाज ठप हो गया है। राज्य के सभी 537 अंचलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों के सामूहिक हड़ताल पर चले जाने से ज़मीन से संबंधित काम के अलावा जनहित से जुड़े कई काम रूक गये हैं। इससे न केवल आम लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दाखिल-खारिज, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र के अलावा कई काम रूक गये हैं।

हड़ताल पर जाने वाले दोनों संगठन ‘बिरसा’ और ‘बिरसा यूनाइटेड’ शामिल हैं। दोनों संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की जायेगी, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।

राजस्व कर्मचारी संघ पहले से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। और अब अधिकारियों के भी हड़ताल में शामिल हो जाने के बाद राजस्व विभाग का पूरा सिस्टम ठप हो गया है।

प्रमाण पत्र और ज़मीन से जुड़े कामों के अलावा राज्य में चल रहे सर्वे और चकबंदी का काम भी पूरी तरह से बंद हो चुका है। साथ ही कृषि से संबंधित आंकड़ों का जुटा और उसकी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया भी बंद हो गयी है।

हड़ताल पर सरकार हुई सख्त

इधर सरकार इस हड़ताल को लेकर सख्त रवैया अपना रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी डीएम से हड़ताल पर गये अधिकारियों की लिस्ट मांगी है, साथ ही सभी से सरकारी सामान वापस लेने का आदेश दे दिया है।

विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकारी सेवकों को हड़ताल का मौलिक अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए विभाग राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत हड़ताल नन नेगोशिएबल है।

सरकार और राजस्व अधिकारियों की इस तनातनी में नुकसान न सिर्फ सरकार का हो रहा है बल्कि आम लोग भी परेशान हो रहे हैं। ज़रूरी है कि इस दिशा में ठोस पहल की जाये और वार्ता कर हड़ताल समाप्त करवायी जाये। अगर ये हड़ताल लंबी चली तो प्रशासनिक व्यवस्था के साथ विकास योजनायें भी बाधित होंगी।