Harivansh becomes MP: वरिष्ठ पत्रकार रहे हरिवंश की आवाज राज्यसभा में गूंजती रहेगी। 9 अप्रैल को दूसरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब वे फिर से राज्यसभा सदस्य बन गये हैं।
हरिवंश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। मनोनयन के बाद राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलायी।
हरिवंश लगातार दो बार राज्यसभा के सदस्य चुने गये थे। बिहार से जेडीयू ने उन्हें दो बार सांसद बनाकर भेजा।
हालांकि इस बार जेडीयू ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि ये हरिवंश का आखिरी कार्यकाल होगा।
संसद के उपरी सदन में 12 मनोनीत सदस्य होते हैं। उन्हें राष्ट्रपति अपने विशेषाधिकार से तय कर मनोनीत करते हैं। इन सदस्यों को कला, विज्ञान, समाज सेवा, कला या अन्य क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।
मनोनीत सदस्य पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी जगह हरिवंश को राज्यसभा भेजा गया। उनका कार्यकाल अब 2032 तक रहेगा।
फिर बन सकते हैं उपसभापति
राज्यसभा का कोई भी सदस्य उपसभापति बन सकता है। चाहे वो निर्वाचित होकर आया हो या मनोनीत किया गया हो।
हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं।
ऐसे में उम्मीद है कि एक बार फिर उनके नाम का प्रस्ताव लाया जायेगा और उन्हें सदस्यों की सहमति से उपसभापति बनाया जायेगा।
इस चुनाव की खास बात यह है कि मनोनीत सदस्य उम्मीदवार रहते हुए खुद भी वोट डाल सकते हैं।
