Where is Bihar’s politics heading: बिहार की सियासत देश के अन्य राज्यों से कहीं अलग है। बिहार की सियासत पर देश भर की नज़र रहती है। कहा भी जाता है कि दिल्ली का तख्त और ताज बिहार ही तय करता है।
इन दिनों बिहार की राजनीतिक फिज़ा में अलग ही रंग बह रहा है। ये किस करवट जायेगा किसी को पता नहीं चल रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का ऐलान करने के साथ ही यहां सियासी हलचल चल रही है।
लेकिन इस हलचल में तड़का तब लगा जब नीतीश के बेटे निशांत कुमार (अब तक राजनीति से दूर रहे) अचानक राजनीति में कदम रख दिये।
अभी इस खबर को समझने की कोशिश में लोग लगे ही थे कि अचानक नीतीश कुमार (राज्यसभा उम्मीदवार) ने समृद्धि यात्रा शुरू कर दी। इस यात्रा के जरिये न सिर्फ वो योजनाओं की बरसात कर रहे बल्कि लोगों को अपनी ताकत का अहसास भी करवा रहे हैं।
उधर नीतीश कुमार सीमांचल की यात्रा कर रहे हैं, इधर उनके बेटे निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद पहली बार जेडीयू कार्यालय पहुंचे।
8 मार्च को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हुए। उसके बाद पहली बार वे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जेडीयू कार्यालय पहुंचे।
इस दौरान निशांत कुमार जिंदाबाद के नारे लगे और युवा कार्यकर्ताओं ने उन्हें बिहार का सीएम बनाने की नारेबाजी भी की।
निशांत के मन में क्या है?
निशांत ने जेडीयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि वो जनता दरबार के जरिये लोगों की समस्याओं को सुनने आये थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने 20 सालों में बिहार के भीतर जो भी काम किया है उसे आगे बढ़ायेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि पिता के अधूरे सपने और कामों को वो पूरा करने की कोशिश करेंगे।

नीतीश की यात्रा के जरिये संदेश
सीएम नीतीश ने समृद्धि यात्रा के दौरान अररिया को 545 करोड़ रूपये के परियोजनाओं की सौगात दी।
नीतीश के संबोधन में छिपा राज
नीतीश कुमार ने अपने संबोधन के दौरान लोगों को 2005 से पहले के बिहार की याद दिलाते हुए कहा कि पहले के हालात और अब के हालात देखिये।
संबोधन खत्म करने से पहले उन्होंने ठेठ बिहारी अंदाज़ में लोगों से पूछा कि ‘बताइये सब अच्छा रहेगा न?‘। इसके बाद उन्होंने मंच पर मौजूद सम्राट चौधरी, विजय चौधरी और लेसी सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये सबलोग मिलकर काम करेंगे।
