T20 World Cup: टीम इंडिया के विश्व विजेता बनने के पीछे मास्टरमाइंड कौन, गुमनाम हीरो की कहानी

T20 World Cup: टीम इंडिया ने कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में इतिहास रच दिया। T-20 विश्व कप के फाइनल में न्यूज़ीलैंड को हराकर भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) विश्वविजेता बन गयी है।

सारा देश जश्न में डूबा है, हर ओर टीम इंडिया की वाहवाही हो रही है। लेकिन एक सवाल जेहन में कौंध रहा है कि आखिर इतने उतार-चढ़ाव के बावजूद टीम इंडिया ने इतनी आसानी से विश्व कप कैसे जीत लिया। कौन-कौन हैं इस जीत का हीरो।

टीम इंडिया ने लीग मैचों में शानदार खेल दिखाया। लीग मैचों में अमेरिका को 29 रन, नामीबिया को 93 रन, पाकिस्तान को 61 रन और नीदरलैंड को 17 रनों से हराकर धमाकेदार तरीके से सुपर-8 में प्रवेश किया।

लेकिन सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद और वेस्टइंडीज की जिम्बाव्बे पर धमाकेदार जीत ने टीम इंडिया के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी। सेमीफाइनल में क्वालीफाई करने के लिए अच्छे खेल के साथ कुछ समय के लिए किस्मत के भरोसे भी टीम इंडिया थी।

किस्मत ने साथ दिया, दक्षिण अफ्रीकी टीम अपने तीनों मैच जीती और टीम इंडिया वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गयी।

अब बारी थी फाइनल मुकाबले की। यहां खेल के हर क्षेत्र में टीम इंडिया ने न्यूज़ीलैंड को पीछे छोड़ दिया। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में टीम इंडिया कीवियों से कहीं उपर और सुपर साबित हुई।

गौतम गंभीर बने सुपर हीरो

वैसे तो टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों ने खिताब जीतने में कुछ न कुछ योगदान दिया। लेकिन कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन से विश्व फलक पर एक पहचान छोड़ी। लेकिन उन सबको निखारने का काम किया कोच गौतम गंभीर ने।

गंभीर ने खिलाड़ियों पर विश्वास जताया, उन्हें निडर होकर खेलने के लिए प्रेरित किया और जिसका नतीज़ा सबके सामने है।

मैच के दौरान परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो, उन्होंने हमेशा कप्तान सूर्या समेत टीम के सभी खिलाड़ियों को हौसला दिया।

संजू सैमसन को लगातार टीम में बनाये रखा, परिणाम- प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

अभिषेक शर्मा के खराब खेल के बावजूद प्लेइंग 11 में रखा, परिणाम- फाइनल मुकाबले में घातक बल्लेबाजी की।

तिलक वर्मा के आउट ऑफ फॉर्म होने के बावजूद उनको फिनिशर के रूप में तैयार किया। नतीज़ा- कई मौकों पर तिलक ने गेंदबाजों का तिलक कर दिया।

ईशान किशन लंबे समय से भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाये थे। सैयद मुश्ताक ट्रॉफी में बेहतरीन खेल ने गंभीर का ध्यान ईशान की तरफ खींचा। फिर ईशान वर्ल्ड कप टीम में शामिल हुए।

कप्तान सूर्या का खराब फॉर्म सभी के लिए परेशानी का सबब था। लेकिन कोच गंभीर हमेशा से सूर्या को अपना ट्रंप कार्ड मानते रहे। सूर्या को मैदान के भीतर और मैदान के बाहर भी लगातार सपोर्ट करते रहे।

गंभीर ने डगआउट में बैठकर ही सूर्या को मैदान के भीतर सपोर्ट किया। मुश्किल समय में कौन गेंदबाजी करेगा, कौन बल्लेबाज जायेगा। ये सारी रणनीति टीम इंडिया की जीत का कारण बनी।

गुमनाम हीरो ईशान किशन

इन सबके अलावा एक खिलाड़ी ऐसा भी है जिसकी चर्चा कम हुई, लेकिन भारत के विश्व विजेता बनने में उस खिलाड़ी का बहुत बड़ा योगदान रहा। उस खिलाड़ी को हम गुमनाम हीरो कहें तो गलत नहीं होगा। वो खिलाड़ी हैं झारखंड के लाल ईशान किशन।

लंबे समय से ईशान किशन टीम इंडिया से बाहर चल रहे थे। सैयद मुश्ताक ट्रॉफी में झारखंड की कमान संभाली और उसे चैंपियन बनाया। आखिरकार टी-20 वर्ल्ड कप टीम में जगह मिली। और ईशान ने साबित कर दिया कि वो टीम इंडिया के लिए महत्वपूर्ण खिलाड़ी क्यों हैं।

ईशान ने विश्व कप में 193.29 की स्ट्राइक रेट से 317 रन बनाये। फाइनल मैच में ईशान ने महज 25 गेंदों पर महत्वपूर्ण 54 रन बनाये। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण रही ईशान किशन की फिल्डिंग।

उन्होंने मैदान के हर हिस्से में फिल्डिंग की और अपना जलवा बिखेरा। न्यूज़ीलैंड के खतरनाक बल्लेबाजों को पैवेलियन भेजने में ईशान ने अहम भूमिका निभायी। रचिन रविन्द्र को पिच पर सेट होने से पहले ही ईशान ने बहुत ही शानदार कैच लपककर पैवेलियन वापस भेजा।

इसके बाद खतरनाक साबित हो रहे साईफर्ट को बाउंड्री पर भागते हुए शानदार कैच लपककर डगआउट भेजा और भारत की जीत वहीं पर सुनिश्चित हो गयी।

इसके बाद अक्षर पटेल की गेंद पर डेरिल मिचेल का कैच लपककर मैच को पूरी तरह भारत की झोली में कर दिया।

फाइनल मैच के हीरो भले ही संजू सैमसन या बुमराह रहे हों लेकिन मैच के गुमनाम हीरो के रूप में ईशान किशन के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।