Electricity will give a big shock: पहले ही गैस की किल्लत से लोग परेशान हैं। ज़्यादातर घरों में गैस सिलिंडर की जगह इंडक्शन ने ले ली है। इससे लोगों को थोड़ी राहत ज़रूर मिली थी। लेकिन ये राहत भी खत्म होने वाली है।
दरअसल झारखंड में बिजली की कीमतों में इजाफा हो सकता है। राज्य के करोड़ों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की नजर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हुई है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार बिजली दरों में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है, जिसे लेकर उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गयी है।
50 से 60 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) योग के सामने बिजली दरों में लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। निगम का कहना है कि बढ़ते खर्च, बिजली खरीद की लागत, ट्रांसमिशन और वितरण में होने वाले नुकसान के कारण वर्तमान दरों पर काम करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बिजली व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने और वित्तीय घाटे को कम करने के लिए दरों में बढ़ोतरी जरूरी बताई गई है।
अगर आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है, तो राज्य में बिजली की दरें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसान, छोटे दुकानदार, लघु उद्योग और बड़े उद्योग भी इससे प्रभावित होंगे। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला काफी मायने रखता है, क्योंकि वहां पहले से ही आय के सीमित साधन होते हैं।
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रस्ताव के अनुसार शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर को वर्तमान 6 रुपये 85 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर 10 रुपये 30 पैसे प्रति यूनिट करने की मांग की गई है। वहीं ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह दर 6 रुपये 70 पैसे से बढ़ाकर 10 रुपये 20 पैसे प्रति यूनिट तक करने का सुझाव दिया गया है।
ग्रामीण उपभोक्ता भी होंगे प्रभावित
सिर्फ यूनिट दर ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। शहरी उपभोक्ताओं के लिए मासिक फिक्स्ड चार्ज 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये करने की बात कही गई है, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए इसे 75 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति माह करने का सुझाव दिया गया है।
हालांकि सरकार और आयोग की ओर से उपभोक्ताओं को कुछ राहत देने की भी कोशिश की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त बिजली योजना को जारी रखा जाएगा, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के कि लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े।
अब सभी की निगाहें आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। यह फैसला तय करेगा कि आने वाले साल में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या फिर उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने वाला है।
