मेरी साँसें रुक रही हैं, मैं मर जाऊँगी माँ, बस इतना कहा और हमेशा के लिए शांत हो गई मासूम

narbali

Vishnugarh Murder: वो जब घर से अपनी मां के साथ निकली तो उसे ज़रा भी अंदेशा नहीं था कि ये उसका आखिरी सफर है।
वो कितना रोई होगी, तड़पी होगी, चिल्लाई होगी।
लेकिन जब अपनी मां ही उसकी चीख सुनकर खुश हो रही होगी तो बचाने वाला कौन हो सकता है।
मां के एक बार कहने पर वो हंसते-खेलते साथ में निकल गयी।
पहले वो एक तांत्रिक के घर पहुंची जहां पूजा पाठ किया जाने लगा। उसे लगा होगा कि रामनवमी का त्यौहार है तो पूजा की जा रही है।
इसके बाद बच्ची को नये कपड़े पहनाये गये, टीका लगाया गया, काजल लगाया गया।
वो मासूम तो बड़ी खुश हो रही होगी कि उसकी मां उससे कितना प्यार करती है।
पल भर बाद ही उसे ज़मीन पर लिटाया गया।
सोचिये उसके मन में क्या चल रहा होगा।
मां, ये मुझे तैयार क्यों किया गया है। मां ये तुम्हारे साथ जो अंकल हैं न, मुझे ठीक नहीं लग रहे।
ये आंटी मुझे सिंदूर क्यों लगा रही है मां।
मां, मुझे बचाओ न, ये अंकल मेरा गला दबा रहे हैं। मुझे बहुत तकलीफ हो रही है मां।
मां.. मां.. मां.. ये तुम क्या कर रही हो। मेरा पैर क्यों पकड़ रही हो, मुझे घुटन हो रही है मां।
मां, मेरी सांसें रूक रही है, मैं मर जाऊंगी मां।
मेरा शरीर शांत हो गया है मां, लेकिन मैं अभी भी ज़िंदा हूं मां।
मुझे अपनी आंचल में छुपाकर घर ले चलो न मां।
तुम प्यार से उठाओगी तो मैं फिर से उठ जाउंगी मां।
मैं अब तुम्हें कभी तंग नहीं करूंगी मां।
मैं तो तुमसे कितना प्यार करती हूं न मां।
मां.. मां.. बचाओ.. बचाओ..
ये अंकल पत्थर से मेरा सिर फोड़ दिये मां।
मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं तो बोल भी नहीं पा रही हूं मां।
मां.. मां.. मां..
और शांत हो गयी हमेशा हमेशा के लिए मासूम।

हत्यारिन मां की घिनौनी करतूत

घटना हज़ारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र स्थित कुसुंभा गांव की है जहां एक 12 साल की मासूम बच्ची घर से लापता हो जाती है। अगले दिन झाड़ियों में उसका क्षत-विक्षत शरीर मिलता है। जितने लोग उतनी बातें शुरू हो जाती हैं।

g

कोई कहता कि सामूहिक दुष्कर्म हुआ है, कोई कहता कि गुप्तांगों में लकड़ी और अन्य सामान डालकर दरिंदगी की इंतहा की गयी है। अचानक दिल्ली की निर्भया कांड का घटनाक्रम आंखों के सामने तैरने लगता है। पुलिस पर दबाव बढ़ता है और जांच से कड़ी दर कड़ी खुलती है तो सबकी आंखें फटी की फटी रह जाती है।

बच्ची की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उसकी मां ने ही की थी। हत्या भी इसलिए क्योंकि उसे अपने दूसरे बच्चे को लंबी उम्र देनी थी। किसी तांत्रिक ने झांसे में लिया और अंधविश्वास में मां ने अपनी ही बेटी की बलि चढ़ा दी।

नाबालिग और सुंदर कन्या की थी तलाश

खुलासा ये भी हुआ कि मां रेशमी देवी ने अपने बेटे को ठीक करने के लिए महिला तांत्रिक शांति देवी से संपर्क किया था। उसका बेटा काफी समय से मानसिक अस्थिरता से जुझ रहा था। जिसे ठीक करने के लिए महिला तांत्रिक ने नर बलि का रास्ता सुझाया था।

g

जिसके लिए उसने एक नाबालिग और सुंदर कन्या की बलि चढ़ाने की बात कही थी। यानि एक अस्वस्थ को ठीक करने के लिए किसी स्वस्थ बच्ची को जान से हाथ धोना पड़ा। 251 रुपये लेकर तांत्रिक ने बलि का स्थान और समय तय किया था। और इस खेल में रेशमी देवी का साथ उसके प्रेमी भीम राम ने दिया। जिसके साथ बीते 10 सालों से उसका प्रेम संबंध था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संदेह हुआ गहरा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था, बल्कि उसकी मौत दम घुटने से हुई। जांच में ये भी सामने आया कि पूरे मामले को गुमराह करने की कोशिश की गई थी घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है।

t

तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है जो मौके पर पहुंचकर जांच करेगी। वहीं प्रशासन ने फिलहाल परिवार को मिलने वाली सहायता राशि भी रोक दी है। ये घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस सोच की कहानी है जहां आज भी अंधविश्वास इंसानियत पर भारी पड़ता है। जरूरत है जागरूकता की।जरूरत है सवाल उठाने की।क्योंकि जब तक अंधविश्वास जिंदा है, तब तक ऐसे अपराध भी जिंदा रहेंगे।