Bihar Rajya Sabha elections: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी पूरे उफान पर है। सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की हर कवायद कर रहे हैं। कहीं विधायकों को नज़रबंद किया जा रहा है तो कहीं परेड कराई जा रही है। इन सबके बीच सभी एनडीए और महागठबंधन में शामिल सभी दलों की निगाहें बसपा और AIMIM के विधायकों पर टिकी है।
पांच सीटों पर होने वाले चुनाव में एनडीए की चार सीटों पर जीत कन्फर्म है। लेकिन सिर्फ एक सीट पर स्थिति उहापोह वाली बनी हुई है। दरअसल इस सीट को जीतने के लिए 41 वोटों की ज़रूरत है लेकिन एनडीए के पास मात्र 38 वोट ही बच रहे हैं। ऐसे में 3 विधायकों के जुगाड़ में एनडीए का खेमा पूरा दम लगा रहा है।
बिहार के उपमुख्मंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर रविवार को काफी सरगर्मी रही। यहां एनडीए की ओर से मॉक पोल का आयोजन किया गया। इसमें गठबंधन के लगभग सभी विधायक शामिल हुए।
उधर आरजेडी प्रत्याशी को जीत के ज़रूरी 41 वोटों में सिर्फ 35 वोट ही मौजूद है। ऐसे में महागठबंधन भी जोड़-तोड़ में लग गया है। उनकी नज़र चिराग, मांझी और कुशवाहा की पार्टी के विधायकों पर है।
महागठबंधन के विधायक नज़रबंद
महागठबंधन ने सभी विधायकों को एकजुट रखने के लिए नज़रबंद कर दिया है। सभी को पटना के एक आलीशान होटल में ठहराया गया है।
पार्टी का कहना है कि सभी विधायकों के साथ तेजस्वी यादव बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। कहा यह भी जा रहा है कि बैठक में लालू प्रसाद यादव भी शामिल हो सकते हैं।
सालों बाद बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की स्थिति दिख रही है। ऐसे में दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट करने और उन्हें अपने पाले में रखने का प्रयास कर रहे हैं।
इधर महागठबंधन और एनडीए दोनों की नज़र एक दूसरे के विधायकों पर तो है ही लेकिन इस चुनाव में तुरुप का इक्का साबित दो पार्टियां हो सकती हैं। पहली AIMIM और दूसरी बसपा। AIMIM के पांच तो बसपा के एक विधायक हैं। ऐसे में अगर असद्दुदीन ओवैसी का पार्टी के विधायक टूटे और एनडीए को सपोर्ट कर दिया तो उनकी जीत तय है। जबकि ओवैसी की पार्टी के पांचो विधायक, बसपा के एक विधायक के अलावा महागठबंधन के सभी विधायक एकमत रहे तभी आरजेडी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित हो पायेगी।
