Bihar Politics: बिहार की राजनीति और मौसम का मिजाज बहुत ही अनोखा है। कब बदल जाये या यूं कहें कि ऊंट कब किस करवट बैठ जाये ये किसी को कानो-कान खबर नहीं होती।
नीतीश का BJP के साथ आना, NDA गठबंधन की सरकार बनाना। फिर अचानक NDA का साथ छोड़ आरजेडी के साथ सरकार बना लेना। और फिर एक दिन अचानक RJD का साथ छोड़ वापस बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाना।
हालात ऐसे हो गये हैं कि नीतीश पर भरोसा करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद मुश्किल है। अब एक बार फिर बिहार की राजनीति चर्चा में है। और चर्चा का केन्द्र हैं बिहार के सीएम नीतीश कुमार।
सीएम का पद छोड़ देंगे नीतीश कुमार!
दरअसल चर्चा ये है कि नीतीश कुमार एक बार फिर से केन्द्र की राजनीति में सक्रिय होने रहे हैं। वे राज्यसभा के लिए पर्चा भरेंगे और उच्च सदन में JDU सांसद के तौर पर अगली पारी खेलेंगे।
कोई भी व्यक्ति एक समय में दो सदन का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में नीतीश कुमार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा देते ही उन्हें राज्य के सीएम की कुर्सी भी छोड़नी पड़ेगी। यानी सबसे लंबे समय और सबसे ज़्यादा बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार अब बिहार के सीएम नहीं रहेंगे।
बेटे निशांत को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी !
नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा के लिए नामांकन कर सकते हैं। सवाल यह है कि अगर नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का कमांडर कौन बनेगा। खबर है कि नीतीश के बेटे निशांत (Nishant Kumar) को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। वे जेडीयू का किसी स्तर पर नेतृत्व कर सकते हैं।
नीतीश के बाद बीजेपी का सीएम पर दावा
सदन में पार्टी के सदस्यों के आधार पर बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। JDU85 सीट जीतकर दूसरे नंबर रही। नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव लड़ा गया, इसीलिए JDU को कम सीट आने के बाद भी नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया गया।
लेकिन अब जब नीतीश मुख्यमंत्री ही नहीं रहेंगे तो सीएम की कुर्सी बीजेपी के कोटे में जाना तय है।
नीतीश पर भरोसा कैसे?

बीजेपी कोटे से मुख्यमंत्री कौन होगा ये आने वाले समय में तय होगा। हालांकि इस रेस में सम्राट चौधरी नंबर वन पर हैं। उनके ठीक पीछे विजय कुमार सिन्हा भी हैं। लेकिन नीतीश कुमार इतने कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। यह बात BJP वालों को बहुत अच्छी तरह से पता है।
कहीं नीतीश सीएम की कुर्सी का मोह इसलिए तो नहीं त्याग रहे कि उन्हें अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बेटे निशांत को आगे लाना है। यह राजनीति है और यहां कुछ भी संभव है।
बहरहाल अभी सब कुछ भविष्य के गर्त में है और सभी को इंतज़ार है अगले कुछ घंटों का जब नीतीश राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश करते हुए पर्चा भरेंगे।
