Nishant entered in politics: जेडीयू मतलब नीतीश कुमार। अब तक तमाम राजनीतिक पंडित यही बात समझते आये हैं। लेकिन अब जेडीयू की परिभाषा ही नहीं बदलने वाली है बल्कि उसकी पहचान भी बदलने वाली है।
छात्र जीवन से राजनीति कर रहे नीतीश कुमार ने न केवल बिहार की सत्ता की नई दिशा तय की है बल्कि अपनी पार्टी को भी राष्ट्रीय फलक पर एक बड़ी पहचान दिलायी है।
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने आखिरकार सक्रिय राजनीति में इंट्री ले ली है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलायी।
जानें निशांत कुमार के बारे में
निशांत कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं। स्कूली शिक्षा पटना और मसूरी में पूरी करने के बाद उन्होंने रांची से अपनी इंजीनियरिंग पूरी की। उनके पिता नीतीश कुमार बिहार के सियासी जगत के दिग्गज हैं। सबसे ज़्यादा बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है। बावजूद इसके निशांत कुमार अपने पिता की सियासी
ज़िंदगी से काफी दूर रहते आये। उन्होंने अब तक शादी नहीं की है और हमेशा खुद को बहुत लो-प्रोफाइल रखा। उनकी सादगी और लो-प्रोफाइल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रांची के BIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान शुरूआती दो सालों तक उनके कॉलेज में किसी को पता नहीं चला कि वो एक बड़े राजनेता नीतीश कुमार के बेटे हैं।
निशांत कुमार की चुनौतियां
राजनीति में निशांत कुमार की इंट्री जोरदार हुई, लेकिन उनके सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। दरअसल उनकी चुनौती इसलिए भी बहुत बढ़ जाती है क्योंकि उनके पिता न सिर्फ बिहार बल्कि इस देश के बड़े राजनेता हैं। निशांत को न केवल अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाना होगा. बल्कि जेडीयू को आगे ले जाने की जिम्मेदारी भी उनकी होगी।
परिवारवाद के आरोपों के बीच निशांत को पार्टी और राजनीति में अपनी जगह बनानी होगी।
जनता के बीच अपने पिता की छवि की तरह खुद को सामने लाना होगा, ताकि जनता के दिलों में उनकी जगह बन सके।
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजनीति में आने के बाद निशांत पूरे बिहार का दौरा करेंगे।
हालांकि निशांत को अभी सरकार में शामिल होना जल्दबाजी होगी। ज़रूरी होगा कि वो पार्टी के एक कार्यकर्ता की तरह काम करें। राज्य की जनता को समझें, उनके दिलों में अपने प्रति विश्वास पैदा करें।

