राजनीतिक परेशानी में तेजस्वी यादव, लालू यादव के करीबी मित्र ने तेजस्वी को कह दिया रणछोड़

Tejashwi Yadav in political trouble: बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है। जेडीयू का यह नारा फिलहाल सच होता दिखायी दे रहा है। विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद राज्यसभा चुनाव की सभी सीटों पर जीत इसी बात की तस्दीक कर रही है।

राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 3 विधायक और आरजेडी के एक विधायक लापता रहे। नतीजा हुआ कि एनडीए ने सभी पांचों सीट अपनी झोली में डाल लिये।

चुनाव है तो ज़ुबानी जंग तो चलेगी ही। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर लगातार आरोपों और सिद्धांतों की बौछार कर रहे हैं।

इधर कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट नहीं रख पायी तो ठीकरा सत्ता पक्ष पर फोड़ने लगी। पटना में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विधायक चोरी बंद करो के नारे लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला जलाया।

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम कह रहे हैं कि बीजेपी ने उनके 3 विधायकों को चुरा लिया। अब क्या इंसान भी चोरी होने लगे हैं राजेश राम जी। और अगर हो रहे हैं तो आप काहे नहीं चोरी कर लिये। थोड़ा कमाल दिखा लेते तो महागठबंधन की जीत भी हो जाती और आपकी वाहवाही आलाकमान तक होती सो अलग।

लेकिन राजनीति में ये सब चीज़ें चलती रहती हैं। हॉर्स ट्रेडिंग और छुपने-छुपाने का खेल तो चलता ही रहता है।

महागठबंधन के विधायकों में नाराजगी

तेजस्वी यादव जी, आपने आरजेडी से राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतार दिया। इधर राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं देने वाले महागठबंधन के विधायक कहते हैं कि प्रत्याशी उन्हें पसंद नहीं था, इसीलिए उन्होंने वोट नहीं दिया। तो प्रत्याशी तय करने से पहले विधायकों से मशवरा तो कर लेना चाहिये था। लालू जी की तरह अपना निर्णय थोपेंगे तो लोग काहे आपकी सुनेंगे।

लालू यादव अपने समय के बिहार ही नहीं बल्कि देश के बहुत बड़े नेता थे। जनता उनकी एक आवाज़ पर दौड़ी चली आती थी। नेता, विधायक, सांसद और कार्यकर्ता लालू का पूरा सम्मान करते थे। इसीलिए कह रहे हैं कि लालू प्रसाद के सियासी कद तक पहुंचने में अभी बहुत वक्त लगेगा। आप वहां तक पहुंचें या नहीं ये दूसरी बात है,  लेकिन उनका अनुसरण कर पार्टी और खुद को एक बेहतर और मजबूत स्थिति में तो ले ही जा सकते हैं न।

किसकी राह पर चल रहे तेजस्वी?

लेकिन लगता है तेजस्वी यादव को राहुल गांधी की दोस्ती ज़्यादा रास आ रही है। राहुल गांधी जी भी अचानक कहीं चले जाते हैं। किसी को कुछ पता ही नहीं चलता। और चुनाव के बाद तो गायब होना राहुल गांधी की पुरानी फितरत है। लगता है आपको भी यही पसंद आ रहा है। तभी ना विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद यूरोप घूमने चले गये और अब राज्यसभा में हार के बाद फिर राज्य छोड़ दिया।

अब ऐसे करते रहियेगा तो पार्टी के वफादार और लालू के करीबी रहे लोगों में गुस्सा तो आना जायज है न। आजकल लोग दबी ज़ुबान कहने भी लगे हैं कि तेजस्वी यादव किसी की नहीं सुनते हैं। इसीलिए सोशल मीडिया के जरिये ही लोग आपको नसीहत दे रहे हैं।

लालू के करीबी मित्र ने तेजस्वी को कहा “रणछोड़”

शिवानंद तिवारी जी तो याद हैं न आपको। जी हां, वही वही, जो आपके पिता लालू प्रसाद यादव के करीबी मित्र और आरजेडी के बड़े नेता रहे हैं। उन्होंने आपको नसीहत दी है।

उन्होंने कहा है कि “पराजय से ज़्यादा बुरा है पराजय के उपरांत मैदान छोड़ देना। सुना है तेजस्वी कोलकाता के लिए निकल गये। इसके पहले विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भी उन्होंने बिहार छोड़ अपनी बीवी-बच्चों के साथ पिकनिक मनाने के लिए यूरोप की यात्रा पर निकल गये थे।

तेजस्वी को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि “पराजय के बाद रण छोड़ देने वाले नेताओं के साथ उनके समर्थक नहीं टिकते हैं”।

उन्होंने यह भी पोस्ट किया कि जब हार के बाद कार्यकर्ताओं ने निराशा का भाव हो तो पार्टी के नेता को उनके साथ रहना चाहिये, ना कि तेजस्वी यादव की तरह भाग जाना चाहिये।

वो कहते हैं न राजनीति में मौका कभी खत्म नहीं होता, मतलब जब जागो तब सवेरा। वक्त तो अभी भी है, जाग जाइये और जनता की नब्ज़ पकड़िये।

तेजस्वी से बिहार को हैं बहुत उम्मीदें

आप युवा हैं, आपसे बिहार की जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। इन उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी आपकी है। अगर आपको अभी भी समझ आये तो ठीक वरना एनडीए का मास्टरप्लान तो चल ही रहा है। अभी महागठबंधन बमुश्किल 35 सीट जीत पायी, कहीं ऐसा न हो कि आने वाले चुनाव में सुपड़ा ही साफ हो जाये। फिर तेजस्वी जी विदेश में जाकर कहीं बस जायेंगे और राजेश राम जी अशोक चौधरी जी की राह पर चलते हुए किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम लेंगे।

नोट- यह संपादकीय लेखक वेद प्रकाश के अपने विचार हैं।