CM Samrat Chaudhary: बिहार की सियासत का मतलब नीतीश कुमार और लालू यादव।
पिछले साढ़े तीन दशक से बिहार की राजनीति इन दोनों नेताओं के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही।
चारा घोटाला और अन्य कई मामलों में जेल जाने के बाद से लालू बिहार की राजनीति में सक्रिय रूप से नहीं रह पाये।
लेकिन नीतीश ने न केवल सबसे ज़्यादा बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि बिहार को एक नई दशा और दिशा भी दी।
अब बिहार में नीतीश युग भी समाप्त हो चुका है।
अब बिहार में शुरू होने जा रहा है सम्राट युग।
बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी शपथ लेंगे।
vedtimes.com ने सोमवार को ही यह बता दिया था कि 15 को बिहार में नई सरकार शपथ लेगी और सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) ही बिहार के नये मुख्यमंत्री होंगे।
कौन हैं सम्राट चौधरी?
एक समय में सम्राट चौधरी न सिर्फ बीजेपी बल्कि नीतीश कुमार के धुर विरोधी हुआ करते थे।
विरोध भी ऐसा कि सिर पर पगड़ी बांध कसम खायी थी कि जब तक बिहार की गद्दी से नीतीश को उतार नहीं देंगे और बीजेपी की सरकार नहीं बनायेंगे, तब तक पगड़ी नहीं उतारेंगे।
बाद में नीतीश जी की पार्टी से गठबंधन हुआ तो पगड़ी खुद ही उतर गयी।
सम्राट चौधरी का जीवन और परिवार
मुंगेर जिले के लखनपुर में 16 नवंबर 1968 को सम्राट चौधरी का जन्म हुआ।
राजनीति की पाठशाला उन्होंने लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से शुरू की।
सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी उस समय के कद्दावर नेता थे और आरजेडी के शासनकाल में मंत्री भी रहे।
सम्राट चौधरी की पत्नी और एक बेटा और एक बेटी हैं।
जब सम्राट का बीजेपी ने किया था विरोध
राजनीति में 1990 में इंट्री के बाद सम्राट चौधरी ने राजनीति का ककहरा लालू यादव की पार्टी से सीखा।
इसी ककहरा सीखने के दौरान महज 19 साल की उम्र में वे राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बना दिये गये।
उस वक्त सम्राट चौधरी न विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य थे।
महज 19 साल में मंत्री बनने के बाद इस खबर ने देश और दुनिया में सुर्खियां बटोरी।
बीजेपी ने इसका खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया था।
बाद में उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त किया गया।
वर्ष 2000 में वो पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव जीते और आरजेडी के टिकट पर परबत्ता सीट से विधायक बने।
सम्राट चौधरी का व्यक्तित्व
सम्राट चौधरी ने आरजेडी छोड़ने के बाद नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का दामन थामा।
लेकिन कुछ समय बाद ही वर्ष 2017 में बीजेपी के साथ हो लिये।
बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी ने अपनी अलग पहचान बनायी।
राष्ट्रीय पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी।
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत किया, जातीय समीकरणों को साधा और बड़े और छोटे नेताओं के साथ बेहतर सामंजस्य बनाया।
बिहार के उपमुख्यमंत्री के बाद मुख्यमंत्री बनने वाले वे दूसरे शख्स बने। इससे पहले कर्पूरी ठाकुर ही यह कर पाये थे।
