Sexual Assault Case: उत्तरप्रदेश के बांदा में POCSO कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति-पत्नी को फांसी की सज़ा सुनाई है। दोनों 33 बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के दोषी हैं।
बीते छह माह में POCSO की इसी अदालत ने तीसरी फांसी की सज़ा सुनाकर इतिहास रचा है। कोर्ट ने इस मामले को रेयरेस्ट और रेयर की कैटेगरी में शामिल किया। दोनों पर कोर्ट में कई गंभीर अपराध साबित हुए।
अप्राकृतिक यौनाचार (Unnatural Sex), यौन शोषण, Pornography में बच्चों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसे अपराध को कोर्ट ने माना।
दोनों दोषी हैं कौन?
दोषी निलंबित इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती हैं। दोषी रामभवन सिंचाई विभाग में JE के पद पर तैनात था। चित्रकूट में रहने के दौरान वे छोटे बच्चों का शिकार करता था, जिसमें उसका साथ पत्नी दुर्गावती देती थी।
कोर्ट ने सभी पीड़ितों को 10-10 लाख रूपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 33 बच्चों के साथ हैवानियत की और उनके अश्लील वीडियो बनाये। इन वीडियो को दंपत्ति ने डार्क वेब पर बेचकर पैसे भी कमाये।
सीबीआई की जांच में खुलासा
CBI मामले की जांच कर रही थी, जिसमें यह खुलासा हुआ कि करीब 33 नाबालिग लड़के उनका शिकार हुए। 2010 से 2020 के बीच बांदा और चित्रकूट में यह घिनौना खेल चलता रहा।
ये लोग आसपड़ोस के अलावा रिश्तेदारों के बच्चों को अपना शिकार बनाते थे। गिफ्ट देने या वीडियो गेम का लालच देने के बहाने उन्हें घर बुलाया जाता था। CBI के मुताबिक डार्क वेब पर अश्लील वीडियो बेचकर दोनों अवैध कमाई कर रहे थे।
दोषियों के घर से लाखों रूपये नगद के अलावा लैपटॉप, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव के साथ ही काफी आपत्तिजनक सामग्री भी मिले।
कोर्ट का रिकॉर्ड
इससे पहले मासूम के दुष्कर्म (Rape) के दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई जा चुकी है। लगातार कड़े फैसले आने से समाज में यह कड़ा संदेश जा रहा है कि मासूमों के खिलाफ अपराध अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
दुष्कर्म मामले में बीते छह माल में तीसरी बार फांसी की सज़ा सुनाई गई। सज़ा सुनाने वाले जज प्रदीप कुमार मिश्र ने इससे पहले चिल्ला और कालिंजर में मासूम के साथ दुष्कर्म मामले में दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी।
छह महीने के भीतर तीसरी बार फांसी की सज़ा सुनाने वाले पहले जज प्रदीप कुमार मिश्र बन गये हैं।
