क्यों मनाई जाती है ईद? जानें ईद उल फितर के बारे में सबकुछ

Eid ul Fitr: ईद-उल-फितर आज उल्लास और उमंग के माहौल में मनाया जा रहा है। ईद पर्व का फैसला चांद के दीदार के साथ होता है। बीते शाम चांद का दीदार हुआ और आज यह पर्व मनाया जा रहा है। इस्लामिक कैलेंडर हिज़री के 10 वें महीने शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद मुस्लिम समुदाय के लोगों का सबसे बड़ा त्यौहार है।

क्या होता है ईद-उल-फितर?

रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर हिज़री का 09 वां महीना है। इसके बाद 10वां महीना शव्वाल का शुरू होता है। इस महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। हिज़री कैलेंडर का हर महीना चांद निकलने से शुरू होता है और उसके डूबने पर खत्म होता है। शव्वाल के चांद के दीदार के साथ ईद मनाई जाती है। ईद के दिन घर में मीठे पकवान बनते हैं। सभी घरों में सवइयां जरुर बनाई जाती हैं। नए कपड़े पहनना, इत्र लगाना, एक दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देना यह सभी इस त्यौहार की खुशियां हैं। लेकिन सिर्फ यही काम करने से ईद पूरी नहीं होती। ईद के मायने खुशी होते हैं और इस त्यौहार को सभी के साथ हंसी-खुशी से मनाना सबसे महत्वपूर्ण काम है।

मुसलमानों को अल्लाह ने खुशी के तौर पर दो ईद दी हैं। इनमें एक ईद-उल-फितर और दूसरे को ईद-उल-अज़हा कहा जाता है। रमजान के पवित्र महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर और हिज़री कैलेंडर के अंतिम महीने ज़िलहिज्जा की 10 तारीख को ईद-उल-अज़हा ममाया जाता है।

आज ईद-उल-फितर है इसीलिए बात आज के दिन की करते हैं। इस दिन सभी मुस्लिम ईद की खुशियों में शामिल होते हैं। इस त्यौहार की खुशी में अमीर-गरीब की कोई खाई नहीं होती। सभी लोग नए कपड़े पहनते हैं और अच्छे पकवान खाते हैं।

अमीर-ग़रीब और हर वर्ग के लोग मिलकर मनाते हैं ईद। बताते हैं इस त्यौहार के बारे में।

पैंगबर से ईद का है सीधा नाता

रमजान का महीना खत्म होने के बाद ईद मनाई जाती है। यह खुशियों का त्यौहार है। इसकी शुरुआत 02 हिज़री यानी 624 ईस्वी में पहली बार हुई थी। इस त्यौहार को मनाने की दो बड़ी वजह है। पहली जंग-ए-बद्र में जीत हासिल करना। यह जंग 02 हिज़री 17 रमजान के दिन हुई थी। यह इस्लाम की पहली जंग थी। इस लड़ाई में 313 निहत्थे मुसलमान थे। वहीं दूसरी ओर तलवारों और अन्य हथियारों से लैस दुश्मन फौज की संख्या 1 हजार से अधिक थी। इस जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद की अगुआई में मुसलमान बहुत बहादुरी से लड़े और जीत हासिल की। इस जीत की खुशी में मिठाई बांटी गई और एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी गई। इसी खुशी में ईद मनाए जाने की बात कही जाती है।

दूसरी बड़ी वजह रमजान के पूरे महीने में रखे जाने वाले रोजे, रात की तरावीह और अल्लाह की इबादत पूरी होने की खुशी में ईद मनाई जाती है। कुरान के मुताबिक ईद को अल्लाह की तरफ से मिलने वाले इनाम का दिन माना जाता है।

एक महीने तक रोजे रखने के बाद मुसलमान ईद पर दिन के उजाले में पकवान खाते हैं और खुशियां मनाते हैं। इस दिन खजूर और मीठे पकवान खाने की परंपरा चली आ रही है, जिनमें सेवइयां प्रमुख हैं। मीठे पकवानों की वजह से आम बोल-चाल की भाषा में भारत सहित कुछ एशियाई देशों में इसे मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन ईदगाह में सभी लोग मिलकर ईद की नमाज अदा करते हैं।

अमीर-गरीब की खाई मिट जाती है

ईद-उल-फितर के दिन अमीर और गरीब की खाई मिट जाती है। ईद का त्यौहार सबके साथ खुशियां मनाने का पैगाम देता है। सभी मुसलमान चाहे वो अमीर हो या गरीब सभी इस दिन एक साथ नमाज अदा करते हैं। इस दिन सभी लोग ईद की खुशियों में शामिल होते हैं और इसके लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं।

फितरा और जकात के मायने

ईद के मायने खुशी हैं जिसे आप समझ चुके हैं। अब बात “फितर” की करते हैं जिसका मतलब धर्मार्थ उपहार है। इस्लाम में चैरिटी यानी फितरा देना ईद का सबसे अहम हिस्सा है। ईद की नमाज से पहले हर संपन्न मुसलमान को फितरा देना जरूरी है। यह फितरा गरीबों को दिया जाता है, जिससे वह भी अपनी ईद मना सकें और खुशियों में शामिल हो सकें। इस्लाम में फितरा देना वाजिब है। वहीं जकात देना फर्ज यानी अनिवार्य है। जकात वो मुसलमान देता है जिसके पास इस्लाम के बताए गए नियमों के मुताबिक सोना, चांदी, नकदी और व्यापार हो। इसका एक हिस्सा जकात के रूप में गरीब और जरुरतमंद लोगों को देना हर सक्षम मुसलमान के लिए फर्ज है।

यह जकात अपने गरीब रिश्तेदारों, पड़ोसियों या गरीबों को दिया जा सकता है। अधिकतर मुसलमान ईद से पहले जकात अदा करते हैं। ईद के दिन की शुरुआत सुबह फज्र की नमाज के साथ होती है। फिर सभी लोग ईद की नमाज के लिए तैयारियां शुरू कर देते हैं। इस दिन पुरूष लोग ईद की नमाज के लिए ईदगाह जाते हैं।

नमाज से पहले नहाकर नए कपड़े पहने जाते हैं। खुशबू के लिए इत्र लगाया जाता है। घर से निकलने से पहले खजूर या सीर खाई जाती है। फिर वुजू करके नमाज के लिए जाया जाता है। ईदगाह में सभी मुसलमान इकट्ठा होकर कांधे से कंधा मिलाकर ईद की नमाज पढ़ते हैं जो सुबह सूरज निकलने के बाद पढ़ी जाती है। ईद की नमाज के बाद सभी लोग एक दूसरे के गले मिलते हैं और ईद की मुबारकबाद देते हैं। इस दिन घरों पर दावत दी जाती है, जो आपसी मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देता है।